आंगनवाड़ी वर्कर से 30 हजार की रिश्वत का आरोप, ICDS सुपरवाइजर और JRA गिरफ्तार
भुवनेश्वर। ओडिशा के गंजाम जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए विजिलेंस विभाग ने एक ICDS सुपरवाइजर और एक जूनियर रेवेन्यू असिस्टेंट (JRA) को कथित तौर पर 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। दोनों पर एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से केंद्र के पिछले 11 महीनों के बकाया मकान किराए का भुगतान जारी कराने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस की टीम ने जाल बिछाया और दोनों को पकड़ लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ICDS सुपरवाइजर बी. उमा पात्रो और जूनियर रेवेन्यू असिस्टेंट नरसिंह बेहरा के रूप में हुई है। दोनों गंजाम जिले के हिंजिलिकट स्थित चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर (CDPO) कार्यालय में तैनात बताए गए हैं। विजिलेंस विभाग अब मामले से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रहा है।
11 महीने का किराया जारी करने के बदले मांगी रिश्वत
विजिलेंस विभाग के अनुसार शिकायतकर्ता महिला आंगनवाड़ी कार्यकर्ता है। जिस भवन में आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हो रहा था, उसके मकान किराए का भुगतान पिछले 11 महीनों से लंबित था। इसी बकाया राशि को जारी कराने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता संबंधित कार्यालय के संपर्क में थी।
आरोप है कि इसी दौरान ICDS सुपरवाइजर और JRA ने भुगतान जारी करने के एवज में महिला से 30 हजार रुपये की मांग की। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि पैसे नहीं देने की स्थिति में न केवल पिछले 11 महीनों का किराया रोका जाएगा, बल्कि आने वाले महीनों का भुगतान भी जारी नहीं किया जाएगा।
विजिलेंस के पास पहुंची आंगनवाड़ी कार्यकर्ता
बार-बार रिश्वत की मांग किए जाने से परेशान आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने आखिरकार ओडिशा विजिलेंस विभाग से संपर्क किया। उसने अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी देते हुए शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस अधिकारियों ने आरोपों का प्रारंभिक सत्यापन किया। इसके बाद आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ने के लिए योजना तैयार की गई। शिकायतकर्ता को तय प्रक्रिया के तहत रिश्वत की रकम लेकर आरोपियों के पास भेजा गया, जबकि विजिलेंस की टीम आसपास निगरानी करती रही।
30 हजार रुपये लेते पकड़े जाने का दावा
विजिलेंस विभाग का कहना है कि शनिवार को कार्रवाई के दौरान दोनों आरोपियों को शिकायतकर्ता से 30 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार करने के मामले में पकड़ा गया। इसके बाद टीम ने रिश्वत की रकम बरामद कर जब्त कर ली।
कार्रवाई के दौरान आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं भी पूरी की गईं। रिश्वत के मामलों में ट्रैप कार्रवाई के बाद बरामद रकम और उससे जुड़े अन्य साक्ष्यों को जांच में शामिल किया जाता है।
किराया नहीं देने की कथित धमकी
शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपियों ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि रिश्वत नहीं देने पर आंगनवाड़ी केंद्र के भवन का लंबित किराया जारी नहीं किया जाएगा। साथ ही भविष्य में मिलने वाला किराया भी रोके जाने की बात कही गई थी।
इस आरोप की अब विजिलेंस जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि किराए की फाइल कब से लंबित थी, भुगतान जारी करने की जिम्मेदारी किन अधिकारियों के पास थी और फाइल की प्रक्रिया में दोनों आरोपियों की क्या भूमिका थी।
CDPO कार्यालय में थे दोनों तैनात
ICDS सुपरवाइजर बी. उमा पात्रो और JRA नरसिंह बेहरा दोनों हिंजिलिकट के CDPO कार्यालय में पदस्थ थे। इस कार्यालय के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़े कई प्रशासनिक और वित्तीय कार्य किए जाते हैं।
मामले के सामने आने के बाद विजिलेंस अधिकारी संबंधित कार्यालय के रिकॉर्ड की जांच कर सकते हैं। इसमें बकाया किराए से संबंधित फाइल, भुगतान आदेश और अन्य दस्तावेज महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
दस्तावेजों की जांच से सामने आएगी पूरी तस्वीर
विजिलेंस विभाग की जांच केवल कथित रिश्वत की रकम की बरामदगी तक सीमित नहीं रहेगी। अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश करेंगे कि आंगनवाड़ी केंद्र के मकान का किराया 11 महीने से क्यों लंबित था।
इसके अलावा यह जांच भी महत्वपूर्ण होगी कि क्या भुगतान रोकने के लिए कोई वैध प्रशासनिक कारण था या कथित रिश्वत की मांग के कारण फाइल को लंबित रखा गया था। संबंधित दस्तावेज और अधिकारियों के बयान से इस बारे में स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
अन्य मामलों की भी हो सकती है जांच
रिश्वत के आरोप में सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद आम तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान किए गए संबंधित कामकाज और शिकायतों की भी पड़ताल की जा सकती है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका या इसी तरह की दूसरी शिकायत सामने आती है तो विजिलेंस अपनी जांच का दायरा बढ़ा सकती है।
दोनों आरोपियों से पूछताछ के जरिए भी यह जानने की कोशिश की जाएगी कि कथित रिश्वत की रकम किस उद्देश्य से मांगी गई थी और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी।
भ्रष्टाचार के मामलों पर विजिलेंस की कार्रवाई
ओडिशा विजिलेंस सरकारी विभागों में रिश्वत और भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों पर लगातार कार्रवाई करती है। शिकायत मिलने पर तथ्यों के सत्यापन के बाद ट्रैप कार्रवाई की जाती है। इस मामले में भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की शिकायत के बाद कार्रवाई की गई।
मामले में आगे आरोपियों के खिलाफ संबंधित भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। जांच एजेंसी द्वारा जुटाए गए साक्ष्य अदालत के सामने पेश किए जाएंगे।
फिलहाल दोनों सरकारी कर्मचारियों पर लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। गिरफ्तारी और एफआईआर में दर्ज आरोप अपने आप में दोषसिद्धि नहीं हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगी।