ओडिशा में 12 GCT चालू, 36 नए कार्गो टर्मिनल को मंजूरी

Update: 2026-07-24 08:03 GMT

भुवनेश्वर : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल’ (GCT) पहल के तहत ओडिशा रेल आधारित माल ढुलाई के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में अब तक 12 कार्गो टर्मिनल चालू हो चुके हैं, जबकि 36 अन्य स्थानों के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी जा चुकी है। इससे आने वाले समय में राज्य में माल परिवहन की क्षमता बढ़ने और औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।

केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल योजना के तहत देशभर में रेल नेटवर्क के माध्यम से माल ढुलाई को अधिक प्रभावी और तेज बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि ओडिशा इस योजना के प्रमुख लाभार्थी राज्यों में शामिल है। राज्य में पहले से चालू 12 कार्गो टर्मिनल रेल मार्ग से माल के आवागमन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, 36 नए स्थानों के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिलने से भविष्य में राज्य के कई औद्योगिक और खनिज क्षेत्रों को रेल आधारित परिवहन सुविधा से जोड़ा जा सकेगा।

ओडिशा खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां लौह अयस्क, कोयला, इस्पात और अन्य औद्योगिक उत्पादों का बड़े पैमाने पर परिवहन होता है। ऐसे में रेल आधारित माल ढुलाई व्यवस्था को मजबूत करने से उद्योगों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। कार्गो टर्मिनलों के विस्तार से माल लोडिंग और अनलोडिंग की प्रक्रिया आसान होगी और परिवहन लागत में भी कमी आ सकती है।

केंद्रीय मंत्री ने लोकसभा में यह भी जानकारी दी कि क्योंझर लोकसभा क्षेत्र के पोरजानपुर (PRNR) में एक नए गति शक्ति कार्गो टर्मिनल की स्थापना का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है। प्रस्ताव पर संबंधित स्तरों पर समीक्षा की जा रही है। मंजूरी मिलने के बाद इस क्षेत्र में भी रेल माल परिवहन की सुविधाओं को बढ़ावा मिल सकता है।

गति शक्ति कार्गो टर्मिनल योजना का उद्देश्य रेलवे और अन्य परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। इसके तहत ऐसे टर्मिनल विकसित किए जा रहे हैं, जहां सड़क, रेल और अन्य परिवहन साधनों के माध्यम से सामान की आवाजाही को अधिक सुगम बनाया जा सके।

रेल मंत्रालय का मानना है कि इस पहल से निजी क्षेत्र की भागीदारी भी बढ़ेगी और देश में लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। आधुनिक कार्गो टर्मिनलों के निर्माण से व्यापारियों और उद्योगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा माल परिवहन में लगने वाला समय कम होगा।

ओडिशा में इस परियोजना का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि राज्य देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में से एक है। यहां स्थित खनन क्षेत्र, इस्पात संयंत्र और ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे माल और तैयार उत्पादों का परिवहन होता है। बेहतर कार्गो नेटवर्क से इन क्षेत्रों की कार्यक्षमता बढ़ सकती है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, नए कार्गो टर्मिनलों के विकास से रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। निर्माण, संचालन और रखरखाव से जुड़े क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर लोगों को काम मिल सकता है। साथ ही, उद्योगों के लिए आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत होगी।

केंद्र सरकार देश में माल ढुलाई को सड़क परिवहन से अधिक रेल आधारित बनाने पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य परिवहन व्यवस्था को अधिक किफायती, तेज और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। गति शक्ति योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ओडिशा जैसे औद्योगिक राज्य में कार्गो टर्मिनलों का विस्तार राज्य की अर्थव्यवस्था को गति दे सकता है। इससे न केवल बड़े उद्योगों को फायदा होगा, बल्कि छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए भी परिवहन सुविधाएं बेहतर होंगी।

फिलहाल ओडिशा में 12 गति शक्ति कार्गो टर्मिनल सक्रिय हैं और 36 नए स्थानों पर विस्तार की तैयारी चल रही है। पोरजानपुर सहित अन्य प्रस्तावित परियोजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद राज्य का रेल माल ढुलाई नेटवर्क और मजबूत होने की उम्मीद है।

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