हीराकुंड बांध के 10 और गेट खुले, बढ़ते जलस्तर के बीच 12 गेटों से छोड़ा जा रहा पानी
संबलपुर। ऊपरी इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जलाशय का जलस्तर बढ़ने के बाद ओडिशा के संबलपुर स्थित हीराकुंड बांध में पानी का दबाव बढ़ गया है। स्थिति को देखते हुए शुक्रवार को बांध के 10 और गेट खोल दिए गए। इसके साथ ही अब बांध के कुल 12 गेटों के जरिए अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, जलाशय में लगातार बढ़ रहे जलप्रवाह को नियंत्रित करने और बांध की सुरक्षा बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। बारिश के कारण महानदी और उसकी सहायक नदियों में जलस्तर बढ़ने से हीराकुंड जलाशय में पानी की आवक लगातार बढ़ रही थी।
हीराकुंड बांध ओडिशा की सबसे महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में से एक है। जल प्रबंधन, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और बिजली उत्पादन में इसकी बड़ी भूमिका है। मानसून के दौरान जलाशय में पानी की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाती है ताकि जरूरत के अनुसार गेट खोलकर जल प्रवाह को नियंत्रित किया जा सके।
बांध प्रबंधन की ओर से बताया गया कि ऊपरी कैचमेंट क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण जलाशय में पानी की आवक बढ़ी है। इसके चलते अतिरिक्त पानी को धीरे-धीरे बाहर निकाला जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर और मौसम की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है।
गेट खोले जाने के बाद महानदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन की ओर से संबंधित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी संभावित स्थिति से निपटा जा सके।
ओडिशा में मानसून के दौरान हीराकुंड बांध से पानी छोड़े जाने की प्रक्रिया सामान्य है। हालांकि, जब बारिश अधिक होती है और जलाशय में पानी का स्तर तेजी से बढ़ता है, तो बांध के गेट खोलने की आवश्यकता पड़ती है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी किनारे जाने से बचें और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। विशेष रूप से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है।
हीराकुंड बांध के गेट खोलने का असर महानदी के जल प्रवाह पर पड़ता है। इसलिए नदी के आसपास के क्षेत्रों में जलस्तर की निगरानी की जा रही है। जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अधिकारी आपसी समन्वय के साथ स्थिति पर नजर रख रहे हैं।
इस बीच, राज्य के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश का दौर जारी है। भारी बारिश के कारण कुछ क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति भी बनी हुई है। प्रशासन ने राहत और बचाव व्यवस्था को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े जलाशयों का प्रबंधन मानसून के दौरान बेहद संवेदनशील प्रक्रिया होती है। जलाशय में पानी की मात्रा, बारिश का पूर्वानुमान और नदियों के प्रवाह को ध्यान में रखते हुए ही गेट खोलने या बंद करने का निर्णय लिया जाता है।
हीराकुंड बांध का निर्माण मुख्य रूप से बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई के उद्देश्य से किया गया था। समय के साथ यह ओडिशा के जल संसाधन प्रबंधन का अहम केंद्र बन गया है। हर साल मानसून के दौरान बांध की स्थिति पर विशेष निगरानी रखी जाती है।
फिलहाल बांध से 12 गेटों के जरिए पानी छोड़ा जा रहा है और अधिकारियों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है। जलस्तर, बारिश और जलप्रवाह के आधार पर आगे के फैसले लिए जाएंगे।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। सुरक्षा के लिहाज से सभी संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है।