मिजोरम में शिक्षा नियम 2026 के खिलाफ राज्यव्यापी प्रदर्शन, एडहॉक सहायता प्राप्त स्कूलों के भविष्य पर उठे सवाल

Update: 2026-07-26 15:04 GMT

आइजोल। मिजोरम में शिक्षा नियम 2026 को लेकर शिक्षकों और स्कूल संगठनों ने राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नए नियम एडहॉक सहायता प्राप्त हाई स्कूलों की व्यवस्था को कमजोर कर सकते हैं और लंबे समय से चली आ रही स्कूलों के प्रांतीयकरण (Provincialisation) की मांग को प्रभावित कर सकते हैं।

विरोध प्रदर्शन के दौरान राज्य के 80 से अधिक स्कूलों ने "नो टीचिंग डे" मनाया। इस दौरान शिक्षकों ने नियमित कक्षाओं का बहिष्कार करते हुए सरकार से शिक्षा नियमों पर पुनर्विचार करने और शिक्षकों व स्कूलों की मांगों को गंभीरता से लेने की अपील की।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एडहॉक-असिस्टेड हाई स्कूल लंबे समय से राज्य की शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन स्कूलों में बड़ी संख्या में छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन नए नियमों के कारण इन संस्थानों की स्थिरता और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

शिक्षक संगठनों का मुख्य मुद्दा स्कूलों के प्रांतीयकरण की मांग है। उनका कहना है कि कई एडहॉक सहायता प्राप्त स्कूल वर्षों से सेवा दे रहे हैं और सरकार से इन्हें स्थायी सरकारी व्यवस्था में शामिल करने की मांग लगातार की जा रही है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नए नियम इस लंबित मांग को और पीछे धकेल सकते हैं।

राज्यभर में हुए विरोध प्रदर्शनों में शिक्षकों, स्कूल प्रबंधन समितियों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि शिक्षा नियम 2026 को लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों से बातचीत की जाए और उनकी चिंताओं को दूर किया जाए।

शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नीतियां बनाना जरूरी है, लेकिन ऐसी नीतियां नहीं होनी चाहिए जिससे पहले से चल रहे स्कूलों और उनमें कार्यरत शिक्षकों पर नकारात्मक प्रभाव पड़े। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला लेना चाहिए।

विरोध कर रहे संगठनों ने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। उन्होंने सरकार से तत्काल संवाद शुरू करने और शिक्षा नियम 2026 में आवश्यक संशोधन करने की मांग रखी है।

वहीं, सरकार की ओर से अभी तक प्रदर्शन को लेकर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में सुधार और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है।

मिजोरम में शिक्षा नियमों को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राज्य की शिक्षा नीति और स्कूलों के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है। शिक्षकों का आंदोलन यह संकेत दे रहा है कि शिक्षा क्षेत्र में किसी भी बड़े बदलाव को लागू करने से पहले जमीनी स्तर पर काम कर रहे लोगों की भागीदारी और सहमति जरूरी है।

राज्य के शिक्षक संगठन अब सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे छात्रों के हितों और स्कूलों की स्थिरता के लिए अपनी मांगों को लेकर लगातार आवाज उठाते रहेंगे। फिलहाल मिजोरम में शिक्षा नियम 2026 को लेकर विवाद जारी है और आने वाले दिनों में इस पर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत अहम भूमिका निभा सकती है।

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