बराक नदी को नया जीवन देने की तैयारी आठ जिले होंगे बहाली परियोजना में शामिल
आठ जिले होंगे बहाली परियोजना में शामिल
आइजोल: मिजोरम के आठ जिलों को बराक नदी कैचमेंट बहाली परियोजना में शामिल किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य बराक नदी के जलग्रहण क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, क्षतिग्रस्त भूमि की बहाली और जल स्रोतों को बेहतर बनाना है। परियोजना के जरिए नदी से जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के साथ मिट्टी और जल संरक्षण पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।
बराक नदी और उससे जुड़ा जलग्रहण क्षेत्र पूर्वोत्तर भारत के लिए पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। पहाड़ी क्षेत्रों में जंगलों की स्थिति, मिट्टी का कटाव और वर्षा जल का बहाव सीधे नदी और उसकी सहायक धाराओं को प्रभावित करता है। ऐसे में कैचमेंट क्षेत्र की बहाली को दीर्घकालीन जल सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर देखा जा रहा है।
आठ जिलों में होगा काम
परियोजना के तहत मिजोरम के आठ जिलों के चयनित क्षेत्रों में अलग-अलग संरक्षण गतिविधियां संचालित की जाएंगी। स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और पर्यावरणीय जरूरतों के अनुसार कार्ययोजना तैयार की जा सकती है। इसमें खराब हो चुकी भूमि की बहाली, पौधरोपण, प्राकृतिक वनस्पतियों के संरक्षण और मिट्टी के कटाव को रोकने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। जलग्रहण क्षेत्र में छोटे जल स्रोतों और प्राकृतिक नालों को संरक्षित करने पर भी जोर दिया जा सकता है।
मिट्टी का कटाव रोकना बड़ी चुनौती
मिजोरम जैसे पहाड़ी राज्य में भारी बारिश के दौरान मिट्टी के कटाव और भूस्खलन का खतरा बना रहता है। जंगलों की कमी या भूमि के अत्यधिक इस्तेमाल से यह समस्या और गंभीर हो सकती है। बहकर आने वाली मिट्टी नदियों में जमा होने से उनकी जलधारण क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। कैचमेंट बहाली के जरिए ढलानों पर हरित आवरण बढ़ाने और वर्षा जल को नियंत्रित तरीके से जमीन में समाहित करने में मदद मिल सकती है।
स्थानीय लोगों की भूमिका होगी महत्वपूर्ण
पर्यावरण से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं की सफलता में स्थानीय समुदायों की भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जाती है। गांवों और स्थानीय संस्थाओं को संरक्षण गतिविधियों से जोड़ने पर परियोजना का असर लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों को पौधरोपण, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के टिकाऊ इस्तेमाल से संबंधित गतिविधियों में शामिल किया जा सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार के सीमित स्थानीय अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
बराक नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को फायदा
बराक नदी प्रणाली पूर्वोत्तर के बड़े हिस्से के लिए महत्वपूर्ण जल संसाधन है। कैचमेंट क्षेत्र में वनस्पति और मिट्टी की स्थिति बेहतर होने से पानी की गुणवत्ता तथा नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अलग-अलग सरकारी विभागों, विशेषज्ञ संस्थानों और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय जरूरी होगा। आठ जिलों को शामिल किए जाने से इस पहल का दायरा व्यापक होगा।
अब विस्तृत कार्ययोजना में यह स्पष्ट होगा कि किन क्षेत्रों को प्राथमिकता मिलेगी, कितने क्षेत्रफल में बहाली का काम होगा और परियोजना को किस समयसीमा में पूरा किया जाएगा।