आइजोल: मिजोरम में नशीले पदार्थों की लत से प्रभावित लोगों को उपचार और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 48 नशा मुक्ति केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से वर्तमान में 5,200 से अधिक लोगों को विभिन्न प्रकार की सेवाएं दी जा रही हैं। राज्य में नशीले पदार्थों के सेवन की समस्या से निपटने के लिए उपचार के साथ जागरूकता और पुनर्वास पर भी जोर दिया जा रहा है।
नशा मुक्ति केंद्रों में आने वाले लोगों को उनकी जरूरत के अनुसार उपचार, काउंसलिंग और पुनर्वास संबंधी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। नशे की लत से बाहर निकलने की प्रक्रिया में मानसिक और सामाजिक सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी वजह से केंद्रों में प्रभावित लोगों को सामान्य जीवन में वापस लौटने के लिए जरूरी मार्गदर्शन देने का प्रयास किया जा रहा है।
राज्य में 48 केंद्रों का संचालन इस बात को दर्शाता है कि नशे की समस्या से निपटने के लिए संस्थागत स्तर पर व्यवस्था तैयार की गई है। इन केंद्रों से जुड़े 5,200 से अधिक लोगों को नशे से दूर करने और उनके जीवन को दोबारा व्यवस्थित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उपचार के दौरान जरूरत के आधार पर स्वास्थ्य संबंधी निगरानी और मनोवैज्ञानिक परामर्श जैसी सेवाएं भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
मिजोरम की भौगोलिक स्थिति के कारण नशीले पदार्थों की तस्करी भी लंबे समय से चिंता का विषय रही है। राज्य की अंतरराष्ट्रीय सीमा म्यांमार से लगती है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी रोकने के लिए लगातार अभियान चलाती हैं। विभिन्न कार्रवाइयों में मादक पदार्थों की खेप जब्त करने के साथ तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाती रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक नशीले पदार्थों की समस्या को केवल कानून-व्यवस्था के जरिए खत्म करना संभव नहीं है। नशे की गिरफ्त में आ चुके लोगों के लिए समय पर इलाज, काउंसलिंग और पुनर्वास की व्यवस्था भी जरूरी होती है। इस लिहाज से नशा मुक्ति केंद्र प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नशे से बाहर निकलने वाले लोगों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाना भी पुनर्वास प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। परिवार का सहयोग, नियमित काउंसलिंग और रोजगार या कौशल विकास के अवसर व्यक्ति को दोबारा नशे की तरफ जाने से रोकने में मदद कर सकते हैं।
इसके साथ ही युवाओं को नशीले पदार्थों के नुकसान के बारे में जागरूक करना भी जरूरी है। स्कूलों, कॉलेजों और समुदाय स्तर पर जागरूकता अभियान के माध्यम से लोगों को नशे के स्वास्थ्य और सामाजिक दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी जा सकती है।
मिजोरम में संचालित 48 नशा मुक्ति केंद्र और उनसे सेवाएं प्राप्त कर रहे 5,200 से अधिक लोग राज्य में उपचार एवं पुनर्वास व्यवस्था के व्यापक दायरे को दिखाते हैं। नशे के खिलाफ लड़ाई में कानून प्रवर्तन के साथ उपचार, पुनर्वास और जनजागरूकता को मजबूत करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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