शिलांग: मेघालय में जिला चयन समिति (DSC) की परीक्षाओं में खासी भाषा की अनिवार्यता को लेकर विरोध तेज हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार 2,000 से अधिक गारो समुदाय के लोगों ने इस शर्त का विरोध करते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकारी भर्ती परीक्षाओं में किसी एक क्षेत्रीय भाषा को अनिवार्य करने से उन अभ्यर्थियों को कठिनाई हो सकती है, जो राज्य के दूसरे हिस्सों और अलग-अलग समुदायों से आते हैं। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग की है। गारो संगठनों और प्रतिनिधियों का कहना है कि मेघालय एक बहुभाषी राज्य है, जहां अलग-अलग समुदायों की अपनी भाषाएं और सांस्कृतिक पहचान हैं। ऐसे में भर्ती परीक्षाओं में भाषा संबंधी नियम बनाते समय सभी समुदायों की चिंताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
विरोध कर रहे लोगों ने संबंधित अधिकारियों से DSC परीक्षाओं के नियमों की समीक्षा करने की अपील की है। उनका कहना है कि भाषा का ज्ञान महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे इस तरह लागू किया जाना चाहिए जिससे किसी समुदाय के उम्मीदवारों को अनुचित नुकसान न हो।
मेघालय में खासी और गारो राज्य की प्रमुख जनजातीय भाषाओं में शामिल हैं। राज्य में प्रशासनिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में भाषाओं की भूमिका को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है।
वहीं, भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की ओर से नियमों और भाषा मानदंडों को लेकर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है। सरकार और संबंधित विभाग इस मुद्दे पर आगे क्या निर्णय लेते हैं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। मामले को लेकर समुदायों के बीच संवाद और सहमति बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।
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