इंफाल: मणिपुर में सहकारी आंदोलन को मजबूत और प्रासंगिक बनाए रखने के लिए युवाओं और महिलाओं की अधिक भागीदारी जरूरी है। राज्य के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार डब्ल्यू इबोहाल ने यह बात सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय (DIPR) के सभागार में आयोजित ‘मीट द प्रेस’ कार्यक्रम के 15वें सत्र में कही। उन्होंने सहकारी क्षेत्र को रोजगार, उद्यमिता और आजीविका के नए अवसर पैदा करने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
इबोहाल ने कहा कि सहकारी क्षेत्र को केवल ग्रामीण ऋण उपलब्ध कराने वाली पारंपरिक व्यवस्था के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बदलती तकनीक और बाजार के दौर में सहकारी संस्थाएं युवाओं को व्यवसाय शुरू करने, मिलकर काम करने, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और आजीविका के नए अवसर तलाशने में मदद कर सकती हैं।
मणिपुर में 11,659 सहकारी समितियां
रजिस्ट्रार के मुताबिक मणिपुर में वर्तमान में 11,659 पंजीकृत सहकारी समितियां हैं और इनके सदस्यों की संख्या करीब 8.20 लाख है। इनमें 5,337 समितियां काम कर रही हैं, जबकि 6,322 समितियां फिलहाल निष्क्रिय हैं। विभाग का जोर निष्क्रिय सहकारी संस्थाओं को पुनर्जीवित करने और मौजूदा संस्थाओं को मजबूत बनाने पर है। उन्होंने बताया कि विभाग ने सहकारी समितियों को कुल 20 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी है। इसमें 36 प्राथमिक बहुउद्देशीय ग्रामीण सहकारी समितियों को 18 लाख रुपये दिए गए हैं। घाटी और पहाड़ी क्षेत्रों की 18-18 समितियों को 50-50 हजार रुपये मिले हैं। इसके अलावा मणिपुर स्टेट हैंडलूम वीवर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड को दो लाख रुपये दिए गए हैं।
मत्स्य पालन के लिए 36.35 करोड़ रुपये
सहकारी क्षेत्र में मत्स्य पालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने इंफाल ईस्ट, इंफाल वेस्ट, काकचिंग और बिष्णुपुर में मत्स्य पालन परियोजनाओं के लिए 36.3565 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसमें 26.789 करोड़ रुपये का ऋण और 9.5675 करोड़ रुपये की सब्सिडी शामिल है। इन परियोजनाओं से 167 सहकारी समितियों को लाभ मिला है।
सहकारी सेवाओं का होगा डिजिटलीकरण
रजिस्ट्रार ने बताया कि सहकारी समितियों से जुड़ी सेवाओं को डिजिटल बनाने पर भी काम चल रहा है। इसके तहत पंजीकरण, ऑडिट, निरीक्षण, जांच, उपनियमों में संशोधन, ई-पेमेंट, चुनाव, अपील और समितियों के पुनरुद्धार जैसी सेवाओं को डिजिटल प्रणाली से जोड़ने की तैयारी है। PACS को भी नेशनल कोऑपरेटिव डेटाबेस से जोड़ने पर काम किया जा रहा है। इबोहाल के मुताबिक केवल वित्तीय सहायता से किसी सहकारी संस्था की सफलता सुनिश्चित नहीं की जा सकती। सदस्यों की सक्रिय भागीदारी, बेहतर प्रबंधन और नए विचार भी जरूरी हैं। इसी कारण विभाग सहकारी आंदोलन में खास तौर पर युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
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