इंफाल: मणिपुर में लंबे समय से विस्थापन का सामना कर रहे लोगों के पुनर्वास को लेकर राज्य सरकार ने विधानसभा में जानकारी दी है। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने बताया कि राज्य में हिंसा के कारण विस्थापित हुए करीब 60 हजार लोगों में से 36 हजार लोगों को दोबारा बसाया जा चुका है, जबकि लगभग 24 हजार लोग अभी भी राहत शिविरों और अस्थायी ठिकानों में रह रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा कि सरकार प्रभावित परिवारों को सुरक्षित तरीके से वापस बसाने और उन्हें जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। विस्थापित लोगों के पुनर्वास के लिए आवास, सुरक्षा और आजीविका से जुड़ी चुनौतियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मणिपुर में मई 2023 में शुरू हुए जातीय संघर्ष के बाद बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए थे। कई परिवारों ने राहत शिविरों में शरण ली, जहां उन्हें लंबे समय तक रहना पड़ा। सरकार के अनुसार अब पुनर्वास प्रक्रिया के तहत हजारों लोगों की घर वापसी कराई गई है।
राहत शिविरों में रह रहे लोगों की चुनौती
अब भी हजारों लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन परिवारों को सुरक्षित माहौल में वापस भेजना और उनके घरों व गांवों में सामान्य स्थिति बहाल करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लौट चुके कई विस्थापित परिवारों को भी आर्थिक परेशानियों और रोजगार की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए केवल पुनर्वास ही नहीं बल्कि आजीविका के साधन उपलब्ध कराना भी सरकार की प्राथमिकता है।
शांति बहाली पर जोर
राज्य सरकार का कहना है कि स्थायी समाधान के लिए शांति और विश्वास बहाली जरूरी है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ प्रभावित समुदायों के बीच संवाद बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मणिपुर में विस्थापन का मुद्दा अभी भी एक बड़ी मानवीय चुनौती बना हुआ है। 36 हजार लोगों की वापसी के बाद भी हजारों परिवारों के पुनर्वास का काम बाकी है, जिस पर सरकार और प्रशासन की नजर बनी हुई है।
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