गुवाहाटी: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का 'विशेष सारांश पुनरीक्षण' (SSR) करेगा। इसमें चुनाव वाले राज्य मणिपुर भी शामिल हैं। इस प्रक्रिया के लिए 1 जनवरी 2027 को 'पात्रता तिथि' (qualifying date) तय की गई है।
संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे गए एक संदेश में, चुनाव आयोग ने कहा कि इस पुनरीक्षण का मुख्य उद्देश्य पात्र मतदाताओं - विशेष रूप से युवाओं और पहली बार मतदान करने वालों - को मतदाता सूची में शामिल करना, मौजूदा प्रविष्टियों में सुधार करना और यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची सटीक और अद्यतन (up-to-date) रहे।
यह कवायद 2027 में कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले की जा रही है। 403 सदस्यों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त हो रहा है, जबकि मणिपुर, गोवा, पंजाब और उत्तराखंड की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर खत्म होगा। इन विधानसभाओं में क्रमशः 60, 40, 117 और 70 सीटें हैं।
'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' (Representation of the People Act, 1950) के तहत, चुनाव आयोग को कार्यकाल समाप्त होने से "छह महीने पहले" चुनाव कराने की अनुमति है।
'विशेष सारांश पुनरीक्षण' (SSR) मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक नियमित प्रक्रिया है, जिसमें नए पात्र मतदाताओं को जोड़ना और मौजूदा प्रविष्टियों में सुधार करना शामिल है। इसके विपरीत, 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) में अधिक व्यापक सत्यापन (verification) किया जाता है। इसमें बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर जाकर जांच करना, मतदाता प्रविष्टियों की गहन पड़ताल करना और दोहरी या अयोग्य प्रविष्टियों की पहचान करना शामिल है।
उदाहरण के लिए, सारांश पुनरीक्षण के दौरान, कोई मतदाता जो किसी नए पते पर चला गया है, वह अपने विवरण को अपडेट करने के लिए आवेदन कर सकता है। वहीं, गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत, अधिकारी यह पुष्टि करने के लिए भौतिक सत्यापन (physical verification) कर सकते हैं कि मतदाता अभी भी अपने पंजीकृत पते पर रह रहे हैं या नहीं, और साथ ही अन्य पात्र निवासियों की पहचान भी कर सकते हैं।
'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) की इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने चिंता जताई है कि इस प्रक्रिया के कारण पात्र मतदाता मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं।
आलोचकों ने दस्तावेजों की आवश्यकताओं और सत्यापन प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि प्रवासी मजदूरों, बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को अपनी पात्रता साबित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इस प्रक्रिया का विरोध करने वालों ने मुख्य चिंता यह जताई है कि इसमें पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। इस प्रक्रिया के कुछ पहलुओं को चुनौती देने वाली याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच गई हैं, जिससे मतदाता सूची में संशोधन करने के चुनाव आयोग के अधिकार और गलत तरीके से नाम हटाए जाने के खिलाफ मौजूद सुरक्षा उपायों की कानूनी जांच की नौबत आ गई है।
चुनाव आयोग का कहना है कि इस व्यापक संशोधन का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है। इसके तहत दोहरी और अयोग्य प्रविष्टियों (जैसे कि मृत मतदाताओं के नाम) को हटाया जाएगा, और साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी पात्र नागरिकों के नाम सूची में शामिल हों।
Tags: