मणिपुर में नई हिंसा पर विपक्ष की चिंता, इंडिया गठबंधन ने मांगा तत्काल हस्तक्षेप
उखरुल-कामजोंग की घटनाओं पर इंडिया गठबंधन मुखर
इंफाल: मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के नेतृत्व में 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात की। उन्होंने राज्य में लंबे समय से चल रहे संकट को देखते हुए केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने राज्य में बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र के विफल होने का हवाला दिया।
प्रतिनिधिमंडल ने लोक भवन में एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उखरुल और कामजोंग जैसे सीमावर्ती जिलों में हाल ही में हुई जानलेवा हिंसा का जिक्र किया गया। साथ ही, राज्य और केंद्र सरकार से अपील की गई कि वे सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए मिलकर कदम उठाएं।
बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए, मणिपुर प्रदेश कांग्रेस समिति (MPCC) के अध्यक्ष इबोबी सिंह ने कहा कि यह संघर्ष कभी मैतेई-कुकी तो कभी नागा-कुकी टकराव के रूप में सामने आ रहा है, और इसके बाद कुकी उग्रवादियों द्वारा मैतेई लोगों को निशाना बनाकर हत्याएं की जा रही हैं।
उन्होंने सवाल किया कि मणिपुर के लोगों को कब तक यह हिंसा झेलनी पड़ेगी और कहा कि लंबे समय से चली आ रही यह अस्थिरता कतई स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या किसी अन्य राज्य में इतने लंबे समय तक चले संकट को बर्दाश्त किया जाता?
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में उनकी संवैधानिक जिम्मेदारियों की याद दिलाई। उनसे आग्रह किया गया कि वे राज्य प्रशासन को सलाह दें और स्थिति को संभालने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तथा केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ समन्वय स्थापित करें।
यह मानते हुए कि कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है, इबोबी सिंह ने कहा कि अब केंद्र का हस्तक्षेप अनिवार्य हो गया है, क्योंकि राज्य सरकार इस संकट को रोकने में विफल रही है। उन्होंने भाजपा की 'डबल इंजन' सरकार की आलोचना करते हुए केंद्र पर आरोप लगाया कि वह मणिपुर की स्थिति को गंभीरता से नहीं ले रही है।
प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत-म्यांमार सीमा के पार सक्रिय सशस्त्र समूह भारतीय नागरिकों पर हमले कर रहे हैं। इबोबी सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है और हिंसा को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाए जाने चाहिए।
ज्ञापन में उन सशस्त्र समूहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है जो संघर्ष विराम की शर्तों का उल्लंघन कर रहे हैं—चाहे वे 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस' (SoO) समझौते का हिस्सा हों या किसी अन्य संघर्ष विराम व्यवस्था से जुड़े हों।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से यह भी अनुरोध किया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात कराने में मदद करें। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि वे राज्य से जुड़े उन मुद्दों को केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाना चाहते हैं, जिन्हें उठाने में शायद मौजूदा राज्य सरकार हिचकिचा रही है।