Manipur मणिपुर : यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) से जुड़ी एक त्वरित अदालत ने बुधवार को एक व्यक्ति और उसकी पत्नी को बच्चों के यौन उत्पीड़न के एक मामले में दोषी ठहराया, जबकि तीसरे आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
विशेष न्यायाधीश (POCSO) आरके मेम्चा देवी ने फैसला सुनाते हुए 58 वर्षीय आरोपी को अपनी नाबालिग सौतेली बेटी पर बार-बार हमला करने के लिए यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 की धारा 10 के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने पाया कि आरोपी, जो पीड़िता का सौतेला पिता होने के नाते विश्वासपात्र था, ने बच्ची का लंबे समय तक यौन शोषण किया। अदालत ने पीड़िता की जैविक मां को भी POCSO अधिनियम की धारा 21 के तहत दोषी ठहराया, क्योंकि उसे अपने पति द्वारा बार-बार किए गए हमलों की जानकारी होने के बावजूद अपराध की सूचना नहीं दी गई थी।