Imphal: मणिपुर के काकचिंग जिले में आठ टट्टुओं की मौत का मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और पशुपालकों में चिंता बढ़ गई है। एक साथ इतनी संख्या में टट्टुओं की मौत ने प्रशासन और पशुपालन विभाग का ध्यान भी खींचा है।
घटना के बाद पशुपालन विभाग की टीमों को स्थिति की जांच के लिए लगाया गया है। अधिकारियों की कोशिश यह पता लगाने की है कि मौत की वजह किसी बीमारी, संक्रमण, जहरीले पदार्थ या अन्य कारण से जुड़ी है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक टट्टुओं की अचानक मौत से इलाके में भय का माहौल है। पशुपालकों को आशंका है कि अगर इसके पीछे कोई संक्रामक बीमारी है तो दूसरे पशुओं पर भी इसका असर पड़ सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मृत टट्टुओं के नमूने जांच के लिए भेजे जा सकते हैं। पोस्टमार्टम और लैब रिपोर्ट के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो पाएगी।
प्रशासन ने पशुपालकों को अपने जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखने और किसी भी असामान्य लक्षण की सूचना तुरंत संबंधित विभाग को देने की सलाह दी है। बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने पर भी जोर दिया जा रहा है।
काकचिंग और आसपास के क्षेत्रों में टट्टुओं का स्थानीय जीवन और परिवहन से भी जुड़ाव रहा है। ऐसे में आठ टट्टुओं की मौत को केवल पशुधन का नुकसान नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए आर्थिक चिंता के रूप में भी देखा जा रहा है। पशुपालन विभाग आसपास के इलाकों में अन्य पशुओं की स्थिति का भी जायजा ले सकता है। जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण अभियान चलाया जा सकता है। फिलहाल अधिकारियों की प्राथमिकता मौत के कारणों का पता लगाना और संभावित संक्रमण की स्थिति में उसे फैलने से रोकना है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।