मणिपुर: भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) की मणिपुर इकाई ने 16 अक्टूबर को इंफाल में एक विरोध रैली निकाली। इस रैली में कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम के इस्तीफे की मांग की गई। उन पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के कुछ छात्रों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाने वाले छात्रों के लिए न्याय की मांग की और जवाबदेही तय करने को कहा। उन्होंने कहा कि इस मामले से मणिपुर को शर्मिंदगी उठानी पड़ी है।
यह रैली नित्यापत चुथेक स्थित भाजपा मुख्यालय से शुरू होकर कांग्रेस भवन की ओर बढ़ी। वहां कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई थी।
प्रदर्शनकारियों के हाथों में ऐसे प्लेकार्ड थे जिन पर लिखा था- "बेटी/छात्र को न्याय दो", "हमें न्याय चाहिए", "हमें शांति चाहिए", "हमें सच जानना है" और "मणिपुर की गरिमा बचाओ"। उन्होंने अकोइजम के खिलाफ लगे आरोपों की निंदा करते हुए उनके इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाए।
कांग्रेस भवन के बाहर, BJYM के सदस्य न्याय की मांग करते हुए नारे लगा रहे थे। वहीं, कार्यालय के गेट पर बैरिकेड के पीछे खड़े मणिपुर प्रदेश कांग्रेस कमिटी (MPCC) के सदस्यों ने "शर्म करो, शर्म करो भाजपा" के नारे लगाकर जवाब दिया।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को कांग्रेस भवन के परिसर में घुसने से रोका और स्थिति को नियंत्रित किया।
BJYM के एक सदस्य ने इन आरोपों पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं (अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के नेताओं सहित) की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने विशेष रूप से राहुल गांधी का जिक्र किया, जो पितृसत्ता के खिलाफ लड़ने की बात करते हैं।
उन्होंने कहा कि एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में पढ़ा रहे मणिपुर के प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगना राज्य के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि युवा मोर्चा चाहता है कि सच सामने आए और न्याय मिले।
इस विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए, MPCC के एक कार्यकारी सदस्य ने सवाल किया कि भाजपा का युवा मोर्चा विपक्ष से न्याय की मांग क्यों कर रहा है, जबकि राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के पास 55 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास केवल पांच हैं।
उन्होंने इस विरोध प्रदर्शन को असामान्य बताया और कहा कि लोग अकोइजम के साथ हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि अंत में न्याय होगा और कांग्रेस सच और जीत का जश्न मनाएगी।
अकोइजम के खिलाफ लगे आरोपों पर अभी कानूनी और जांच प्रक्रिया चल रही है। जब तक उचित प्रक्रिया के माध्यम से आरोपों की पुष्टि न हो जाए, तब तक उन्हें साबित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
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