लातूर। महाराष्ट्र के लातूर जिले में कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से संचालित एक निजी अस्पताल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद 30 वर्षीय महिला की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद पुलिस ने एक महिला डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, जिस अस्पताल में ऑपरेशन किया गया था, उसका पंजीकरण नहीं था और वहां मौजूद ऑपरेशन थिएटर भी नियमों के मुताबिक पंजीकृत नहीं था।

मृतका की पहचान ज्योति शिशुपाल वाल्से (30) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, डॉक्टर ने 11 अगस्त को निजी अस्पताल में ज्योति की सीजेरियन सर्जरी की थी। ऑपरेशन के बाद महिला की हालत बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होने के बाद उसे उपचार दिया गया, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई।

ऑपरेशन के बाद बिगड़ी तबीयत

पुलिस के अनुसार, ज्योति को प्रसव के लिए संबंधित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकीय जांच के बाद डॉक्टर ने सीजेरियन डिलीवरी करने का फैसला लिया। 11 अगस्त को महिला की सर्जरी की गई।

सर्जरी के बाद महिला की तबीयत अचानक खराब हो गई। परिजनों और अस्पताल से जुड़े लोगों की ओर से उसे बचाने की कोशिश की गई, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। आखिरकार महिला की मौत हो गई।

घटना के बाद परिवार की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और अस्पताल की वैधता तथा वहां सर्जरी किए जाने से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की।

अस्पताल और ऑपरेशन थिएटर का पंजीकरण नहीं

जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि जिस अस्पताल में महिला की सर्जरी की गई, वह पंजीकृत नहीं था। इतना ही नहीं, वहां इस्तेमाल किया गया ऑपरेशन थिएटर भी संबंधित नियमों के तहत पंजीकृत नहीं पाया गया।

पुलिस ने यह भी आरोप लगाया है कि सर्जरी ऐसी इमारत में की गई, जो अस्पताल और चिकित्सा सेवाओं के संचालन के लिए निर्धारित मानकों का पालन नहीं करती थी। इस पहलू को भी जांच में शामिल किया गया है।

स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े नियमों के तहत किसी अस्पताल में ऑपरेशन जैसी गंभीर चिकित्सा प्रक्रिया के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे, उपकरण, पंजीकरण और निर्धारित मानकों का पालन जरूरी होता है। ऐसे में पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संबंधित संस्थान किस आधार पर संचालित किया जा रहा था।

सरकारी नौकरी में होने के बावजूद निजी प्रैक्टिस का आरोप

मामले में सबसे गंभीर आरोपों में से एक आरोपी महिला डॉक्टर की सरकारी सेवा से जुड़ी स्थिति को लेकर है। पुलिस के अनुसार, आरोपी डॉक्टर सरकारी नौकरी में थी और उसे निजी अस्पताल में इस तरह सर्जरी करने की अनुमति नहीं थी।

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि डॉक्टर निजी अस्पताल में किस क्षमता में काम कर रही थी और वहां सीजेरियन सर्जरी करने की अनुमति उसे किस आधार पर मिली थी। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि अस्पताल का संचालन कौन कर रहा था और चिकित्सा संबंधी आवश्यक अनुमतियां किसके नाम पर थीं।

जांच अधिकारी अस्पताल के दस्तावेज, डॉक्टर की नियुक्ति और सेवा संबंधी रिकॉर्ड, सर्जरी से जुड़े मेडिकल रिकॉर्ड तथा अन्य जरूरी कागजात की जांच कर सकते हैं।

परिजनों की शिकायत के बाद कार्रवाई

महिला की मौत के बाद परिवार ने पूरे मामले को लेकर पुलिस से शिकायत की। परिजनों ने सर्जरी और अस्पताल की व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर सवाल उठाए। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल की स्थिति की जांच की।

जांच के दौरान अस्पताल और ऑपरेशन थिएटर के पंजीकरण से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी जुटाई गई। इसके बाद आरोपी डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि महिला की मौत के लिए किन परिस्थितियों की भूमिका रही। इसमें ऑपरेशन से पहले महिला की मेडिकल स्थिति, सर्जरी की प्रक्रिया, ऑपरेशन के बाद उपलब्ध कराई गई चिकित्सा सुविधा और महिला की हालत बिगड़ने के बाद उठाए गए कदमों की जांच शामिल हो सकती है।

मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच

मामले की जांच में मेडिकल रिकॉर्ड अहम साक्ष्य हो सकते हैं। पुलिस महिला के इलाज से जुड़े दस्तावेज, ऑपरेशन से संबंधित रिकॉर्ड और अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं की जांच करेगी। इसके अलावा डॉक्टर और अस्पताल से जुड़े अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है।

महिला की मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य चिकित्सकीय जांच रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण होंगी। पुलिस इन रिपोर्टों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय कर सकती है।

निजी अस्पतालों की निगरानी पर सवाल

यह घटना जिले में निजी चिकित्सा संस्थानों की निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े करती है। किसी अस्पताल का बिना पंजीकरण संचालित होना और वहां ऑपरेशन जैसी गंभीर प्रक्रिया किया जाना स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल पैदा करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, प्रसव और सीजेरियन जैसी प्रक्रियाओं में आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ, जरूरी उपकरण, दवाएं और अन्य चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होना जरूरी है। ऐसे में गैर-पंजीकृत संस्थान में इस तरह की प्रक्रिया मरीजों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है।

फिलहाल पुलिस ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और अस्पताल तथा संबंधित चिकित्सक की इसमें क्या भूमिका रही। साथ ही यह भी सामने आएगा कि बिना आवश्यक पंजीकरण और अनुमति के चिकित्सा सुविधा किस तरह संचालित हो रही थी।

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