Maharashtra महाराष्ट्र: राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी को लेकर विवाद गहरा गया है। AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने राज्य सरकार में मंत्री नितेश राणे के हालिया ट्वीट पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान न देश के हित में हैं, न लोकतंत्र की भावना के अनुरूप और न ही भारत की धर्मनिरपेक्ष परंपरा के अनुकूल। वारिस पठान ने कहा, “मुद्दा पेड़ काटने का था और नितेश राणे बकरे पर आ गए। यह कैसी राजनीति है? हम वर्षों से सभी नियमों, कायदे-कानून का पालन करते हुए अपनी ईद मनाते आए हैं। किसी भी धार्मिक उत्सव के दौरान कानून का पालन करना हमारी प्राथमिकता रही है।” उन्होंने आगे कहा कि नितेश राणे का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ ध्रुवीकरण करना है और ऐसा करके वे राज्य की सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
AIMIM प्रवक्ता ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे इस बयान का संज्ञान लें और सुनिश्चित करें कि सरकार के मंत्री अनावश्यक रूप से ऐसे संवेदनशील मुद्दों को हवा न दें, जो समाज में तनाव बढ़ा सकते हैं। वारिस पठान ने कहा कि जब बात पर्यावरण संरक्षण की हो रही हो, तब धार्मिक प्रतीकों और परंपराओं को बीच में लाना न सिर्फ गलत है बल्कि जानबूझकर किया जाने वाला राजनीतिक हथकंडा है। उन्होंने कहा, “हम सभी पर्यावरण के संरक्षण के पक्षधर हैं। पेड़ काटने का मुद्दा पर्यावरण और विकास से जुड़ा मामला है, इसे धार्मिक रंग देना गैरजिम्मेदाराना है। राज्य के मंत्री को यह समझना चाहिए कि महाराष्ट्र की जनता विकास, शांति और भाईचारा चाहती है, न कि विभाजनकारी बयानबाजी।
वारिस पठान ने यह भी कहा कि ऐसे बयान न तो लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप हैं, न ही भारत के बहुसांस्कृतिक समाज की गरिमा को दर्शाते हैं। “नेताओं को चाहिए कि वे अपनी जिम्मेदारी समझें और समाज को जोड़ने का काम करें, न कि बांटने का,” उन्होंने कहा। महाराष्ट्र की राजनीति में यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब राज्य पहले से ही कई विवादित मुद्दों को लेकर चर्चा में है। नितेश राणे का यह बयान नई बहस का कारण बन गया है, जिस पर विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने भी चिंता जताई है।