मुंबई। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार से शिक्षाविद् सोनम वांगचुक के साथ बातचीत करने की अपील की है। अन्ना हजारे ने कहा कि सरकार को वांगचुक की मांगों को लेकर गंभीरता दिखानी चाहिए और किसी भी अप्रिय या दुखद परिणाम का इंतजार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जा सकता है।
अन्ना हजारे ने शनिवार को जारी एक वीडियो संदेश में केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि सरकार को सोनम वांगचुक के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को उनकी मांगों पर सहमति हो या असहमति, लेकिन बातचीत करने में कोई नुकसान नहीं है। संवाद के माध्यम से किसी भी समस्या का समाधान खोजा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से समस्याओं का समाधान करना सबसे बेहतर रास्ता होता है। सरकार को समय रहते कदम उठाना चाहिए ताकि स्थिति बिगड़ने से पहले ही समाधान निकाला जा सके।
दरअसल, शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक नीट पेपर लीक मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वह इस मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वांगचुक इस मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे।
जानकारी के अनुसार, शनिवार को भूख हड़ताल के 21वें दिन सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। स्वास्थ्य कारणों को देखते हुए उन्हें चिकित्सा निगरानी में रखा गया है।
अन्ना हजारे ने वांगचुक के आंदोलन को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार को उनकी मांगों और आंदोलन की गंभीरता को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन को लंबे समय तक चलने देना उचित नहीं है, क्योंकि इससे आंदोलनकारी के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
अन्ना हजारे खुद भी देश में बड़े जन आंदोलनों का नेतृत्व कर चुके हैं। वर्ष 2011 में लोकपाल कानून की मांग को लेकर दिल्ली में उनके अनशन ने तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार पर काफी दबाव बनाया था। उनके आंदोलन के बाद देश में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर व्यापक बहस शुरू हुई थी।
अन्ना हजारे ने अपने संदेश में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता से जुड़े मुद्दों को सुनना और उन पर चर्चा करना सरकार की जिम्मेदारी है।
सोनम वांगचुक लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था, पर्यावरण और लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। नीट पेपर लीक मामले को लेकर उनका कहना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
वांगचुक के आंदोलन को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है। उनके समर्थक सरकार से इस मामले में ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, अन्ना हजारे की अपील के बाद अब इस मुद्दे पर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत की संभावना को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
अन्ना हजारे ने साफ कहा कि किसी भी स्थिति में तनाव बढ़ने से पहले बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान निकालने की दिशा में कदम उठाए। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद ही सबसे प्रभावी माध्यम है और समय रहते बातचीत करने से किसी भी बड़े संकट को टाला जा सकता है।