परभणी। महाराष्ट्र के परभणी जिले में बुधवार दोपहर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। जिंतूर तालुका के कैसाडी गांव में खेत में खेल रहा तीन साल का बच्चा अचानक बिना ढके पड़े पुराने बोरवेल के गड्ढे में गिर गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और प्रशासनिक अधिकारी सक्रिय हुए और बचाव अभियान चलाकर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

अधिकारियों के अनुसार, बच्चे की पहचान अधियान के रूप में हुई है। वह किसान शेख नदीम शेख नसीम का बेटा है। घटना उस समय हुई जब परिवार के सदस्य खेत में काम कर रहे थे और बच्चा आसपास खेल रहा था।

खेलते समय खुले बोरवेल में गिरा बच्चा

बताया गया कि खेत में एक पुराना और बंद पड़ा बोरवेल था, जिसका गड्ढा पूरी तरह ढका नहीं गया था। खेलते-खेलते बच्चा अचानक उसी स्थान पर पहुंच गया और संतुलन बिगड़ने के कारण बोरवेल के गड्ढे में जा गिरा।

बच्चे के गड्ढे में गिरने की जानकारी मिलते ही परिवार के सदस्यों में घबराहट फैल गई। उन्होंने आसपास मौजूद लोगों को घटना की जानकारी दी। कुछ ही समय में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए और बच्चे को बाहर निकालने के प्रयास शुरू कर दिए गए।

अधिकारियों के मुताबिक, बच्चा जमीन से करीब 15 फीट नीचे फंस गया था। गड्ढे की गहराई और स्थिति को देखते हुए बचाव अभियान सावधानी से चलाना पड़ा।

समय पर शुरू हुआ बचाव अभियान

घटना की सूचना प्रशासन और संबंधित बचाव दल को दी गई। स्थानीय लोगों की मदद से बच्चे तक पहुंचने और उसे सुरक्षित निकालने की कोशिश की गई। अभियान के दौरान लगातार बच्चे की स्थिति पर नजर रखी गई।

बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली। घटना के दौरान खेत में मौजूद लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। बच्चे के सुरक्षित निकलने के बाद मौके पर मौजूद लोगों में खुशी का माहौल बन गया।

हालांकि, इस घटना ने खेतों और ग्रामीण क्षेत्रों में खुले पड़े बोरवेलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

खुले बोरवेल बन रहे खतरा

ग्रामीण इलाकों में खेती के लिए बड़ी संख्या में बोरवेल और कुएं बनाए जाते हैं। इनमें से कई बोरवेल पानी का स्तर नीचे चले जाने या तकनीकी कारणों से बंद हो जाते हैं। कई बार ऐसे पुराने बोरवेल को पूरी तरह बंद या सुरक्षित तरीके से ढका नहीं जाता।

खुले बोरवेल विशेष रूप से छोटे बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। बच्चे अक्सर खेतों में खेलते हैं और उन्हें ऐसे गड्ढों की गहराई या खतरे का अंदाजा नहीं होता। कैसाडी गांव की घटना भी इसी खतरे की ओर ध्यान दिलाती है।

परिवार ने ली राहत की सांस

अधियान के बोरवेल में गिरने की खबर फैलते ही परिवार और ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई थी। करीब 15 फीट नीचे फंसे बच्चे को सुरक्षित निकालना चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में बचाव अभियान में जुटे लोगों के लिए भी हर पल महत्वपूर्ण था।

बच्चे के बाहर आने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली। अधिकारियों ने भी घटना के बाद इलाके की स्थिति का जायजा लिया। फिलहाल बच्चे के सुरक्षित होने की जानकारी है।

लापरवाही रोकने की जरूरत

घटना के बाद ग्रामीणों का कहना है कि बंद पड़े बोरवेल को खुला नहीं छोड़ा जाना चाहिए। खेत मालिकों और संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अनुपयोगी बोरवेल को मजबूत तरीके से बंद किया जाए या उसके आसपास सुरक्षा घेरा बनाया जाए।

ग्रामीण क्षेत्रों में खुले बोरवेल की पहचान कर उन्हें सुरक्षित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर नियमित निरीक्षण की जरूरत है। विशेष रूप से ऐसे स्थान जहां बच्चों और ग्रामीणों की आवाजाही रहती है, वहां अतिरिक्त सावधानी बरतनी जरूरी है।

बड़ा हादसा टला

कैसाडी गांव में बुधवार को हुई घटना में बच्चे को समय रहते सुरक्षित निकाल लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। लेकिन यह घटना यह भी याद दिलाती है कि खेतों में खुले और बिना ढके बोरवेल कितने खतरनाक हो सकते हैं।

अधिकारियों के अनुसार, बच्चा करीब 15 फीट की गहराई में फंसा था और उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर खुले बोरवेल की सुरक्षा को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

ग्रामीणों की मांग है कि खेतों में मौजूद पुराने और बंद पड़े बोरवेलों का सर्वे कराया जाए तथा उन्हें तत्काल सुरक्षित तरीके से ढका जाए। इससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकेगा।

तीन साल के अधियान का सुरक्षित बच निकलना परिवार के लिए बड़ी राहत है, लेकिन घटना ने प्रशासन और किसानों के सामने सुरक्षा से जुड़ी एक अहम जिम्मेदारी भी रख दी है। ग्रामीण इलाकों में खुले बोरवेलों को लेकर सतर्कता और समय पर कार्रवाई ही ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोक सकती है।

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