Simhastha Kumbh 2027: नीलगिरी-ब्रह्मगिरी पर वृक्षारोपण अभियान शुरू

Update: 2026-07-02 12:30 GMT

Maharashtra महाराष्ट्र: आगामी सिंहस्थ त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला–2027 की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन को मजबूत करने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान के तहत नीलगिरी पहाड़ी पर व्यापक स्तर पर पौधारोपण कार्य शुरू किया गया है, जबकि ब्रह्मगिरी पहाड़ी पर भी इसी तरह का वृक्षारोपण अभियान चलाने की योजना बनाई गई है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य कुंभ मेले के दौरान बढ़ने वाली भीड़ और गतिविधियों के कारण पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव को कम करना और क्षेत्र में इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन को बढ़ावा देना है। आयोजकों का मानना है कि समय रहते पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम उठाने से न केवल प्राकृतिक संतुलन बना रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में क्षेत्र की हरियाली और जैव विविधता भी सुरक्षित रह सकेगी।

इस अभियान का उद्घाटन एक भव्य समारोह में किया गया, जिसमें देश के कई प्रमुख संत, धार्मिक गुरु और अखाड़ा परिषद के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी जी महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महासचिव तथा पंच दशनाम जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक महंत हरि गिरि जी महाराज भी मौजूद थे।

इसके अलावा समारोह में जगद्गुरु स्वामी चक्रपाणि नंदगिरि महाराज, महंत नारायण गिरि जी महाराज, महंत थानापति महंत आनंद गिरि महाराज, महंत गिरिशानंद गिरि, महंत आनंदेश्वर आनंद गिरि जी महाराज सहित कई अन्य संत और आध्यात्मिक गुरु भी शामिल हुए।

संतों और धार्मिक नेताओं ने इस पहल को पर्यावरण और आध्यात्मिकता के बीच संतुलन स्थापित करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका कहना था कि कुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों के दौरान प्रकृति की सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है, जितनी श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था।

अधिकारियों के अनुसार, नीलगिरी पहाड़ी पर शुरू किया गया यह वृक्षारोपण अभियान आने वाले समय में बड़े स्तर पर विस्तारित किया जाएगा। यहां विभिन्न प्रकार के स्थानीय और पर्यावरण के अनुकूल पौधे लगाए जा रहे हैं, जो क्षेत्र की पारिस्थितिकी को मजबूत करने में मदद करेंगे।

ब्रह्मगिरी पहाड़ी पर प्रस्तावित वृक्षारोपण अभियान को भी इसी योजना का हिस्सा माना जा रहा है। यह क्षेत्र कुंभ मेले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां भारी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही होती है। ऐसे में यहां हरियाली बढ़ाने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभियान न केवल भूमि संरक्षण में मदद करते हैं, बल्कि जल संरक्षण और तापमान संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही, इससे स्थानीय जैव विविधता को भी संरक्षण मिलता है।

कार्यक्रम में मौजूद संतों ने यह भी कहा कि प्रकृति की रक्षा करना भी एक प्रकार की आध्यात्मिक साधना है, और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण छोड़ना सभी की जिम्मेदारी है।

आयोजकों ने बताया कि सिंहस्थ त्र्यंबकेश्वर कुंभ 2027 को न केवल धार्मिक दृष्टि से भव्य बनाने की योजना है, बल्कि इसे पर्यावरण के अनुकूल आयोजन के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। इसी दिशा में यह वृक्षारोपण अभियान एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस पहल के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, धार्मिक संस्थाएं और पर्यावरण संगठन मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि कुंभ मेले के दौरान और उसके बाद भी क्षेत्र में प्राकृतिक संतुलन बना रहे।

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