Pune पुणे : केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों को किसानों से सीधे तौर पर जुड़ने के निर्देश दिए गए हैं ताकि वे उनकी चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझ सकें। मंगलवार को मीडियाकर्मियों से बात करते हुए चौहान ने कहा, "जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैज्ञानिकों और किसानों को आपस में बातचीत करनी चाहिए। वैज्ञानिक अब खेतों में किसानों के बीच आ रहे हैं। किसानों से बातचीत करके हम उनके द्वारा किए जा रहे नवाचारों और आज उनके द्वारा बताई गई जरूरतों को समझ सकते हैं।"
केंद्रीय मंत्री ने महाराष्ट्र में अभिनव कृषि पद्धतियों की प्रशंसा की और जलवायु-अनुकूल फसल किस्मों को अपनाने का आग्रह किया। चौहान ने कोल्ड स्टोरेज आधारित अंगूर निर्यात, शिमला मिर्च की खेती, जैविक मूंगफली की खेती, आम उत्पादन और फूलों की खेती जैसे क्षेत्रों में स्थानीय किसानों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि किसान कृषि में नए प्रयोग कर रहे हैं और उनके प्रयासों को वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से समर्थन दिया जाना चाहिए।
चौहान ने जलवायु परिवर्तन का सामना करने में सक्षम नई फसल किस्मों के विकास की आवश्यकता पर बल दिया। चौहान ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग पर चिंता व्यक्त की, जिसके कारण लाभ में कमी आई और फसल की गुणवत्ता खराब हुई। उन्होंने कहा, "हम बहुत अधिक रासायनिक उर्वरक डालते रहते हैं, जिससे खर्च बढ़ता है और लाभ कम होता है...अधिक रासायनिक उर्वरकों के उपयोग के कारण गुणवत्ता भी खराब होती है।" उन्होंने उत्पादन लागत को कम करने और प्राकृतिक नुकसान के बावजूद किसानों के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए मोदी सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। इससे पहले शनिवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विकसित कृषि संकल्प अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इस अभियान के तहत गांव से मिलने वाली प्रतिक्रिया के आधार पर मांग आधारित शोध किया जाएगा। (एएनआई)
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