पुणे में राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम, बीजेपी ने लगाया पैसे बांटने का आरोप
पुणे। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ पुणे में आयोजित किया जाएगा। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों, युवाओं की चुनौतियों और छात्रों की समस्याओं पर चर्चा के लिए प्रस्तावित इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने कार्यक्रम की आलोचना करते हुए इसे ‘छात्रों की गूंज’ के बजाय ‘पैसे की गूंज’ करार दिया है।
बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस ने राहुल गांधी के कार्यक्रम में युवाओं और आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पैसे दिए हैं। हालांकि, ये आरोप बीजेपी की ओर से लगाए गए हैं और उपलब्ध जानकारी में कांग्रेस की ओर से इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
3,000 इन्फ्लुएंसर्स को भुगतान का आरोप
बीजेपी ने दावा किया है कि कांग्रेस पार्टी ने कार्यक्रम को लोकप्रिय बनाने और अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ने के लिए करीब 3,000 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से संपर्क किया। पार्टी का आरोप है कि प्रत्येक इन्फ्लुएंसर को करीब 30,000 से 35,000 रुपये भुगतान किए जाने की पेशकश या व्यवस्था की गई।
बीजेपी नेताओं ने सवाल उठाया है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर भुगतान किया गया है तो इसके लिए धन कहां से आया और भुगतान की प्रक्रिया किस माध्यम से की गई। पार्टी ने पूरे मामले की जांच की मांग की है।
कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद
‘छात्रों की गूंज’ का उद्देश्य छात्रों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ संवाद करना बताया जा रहा है। ऐसे कार्यक्रमों में छात्रों को अपनी समस्याएं रखने, शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछने और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा करने का अवसर मिलता है।
लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही यह राजनीतिक विवाद में घिर गया है। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस युवाओं के बीच राहुल गांधी की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर नेटवर्क का इस्तेमाल कर रही है।
बीजेपी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम को लेकर महंगे पीआर अभियान और बनावटी प्रचार का सहारा लिया जा रहा है। पार्टी ने दावा किया कि कार्यक्रम और उससे जुड़े प्रचार अभियान पर 10 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं।
बीजेपी ने ऑडियो-वीडियो क्लिप साझा की
बीजेपी ने अपने आरोपों के समर्थन में सोशल मीडिया पर कुछ ऑडियो और वीडियो क्लिप भी साझा की हैं। पार्टी का दावा है कि इन क्लिप में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को भुगतान और यात्रा खर्च दिए जाने को लेकर बातचीत सुनी जा सकती है।
बीजेपी का कहना है कि इन सामग्री की जांच की जानी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि कार्यक्रम में भागीदारी या प्रचार के लिए वास्तव में भुगतान किया गया था या नहीं।
हालांकि, किसी भी ऑडियो या वीडियो क्लिप की प्रामाणिकता और संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण होगी। राजनीतिक दलों की ओर से जारी सामग्री को अंतिम तथ्य मानने से पहले उसकी स्वतंत्र जांच जरूरी है।
पैसे के स्रोत की जांच की मांग
बीजेपी ने कांग्रेस से कथित भुगतान के स्रोत को सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि कार्यक्रम में लोगों को जोड़ने के लिए धन खर्च किया गया है तो उसकी जानकारी सामने आनी चाहिए।
बीजेपी नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि यदि हजारों इन्फ्लुएंसर्स को भुगतान किया गया है तो क्या इसके लिए कोई औपचारिक अनुबंध या भुगतान रिकॉर्ड मौजूद है। पार्टी ने कथित धनराशि के वितरण और उसके स्रोत की जांच की मांग की है।
युवाओं को साधने की रणनीति पर सवाल
राजनीतिक दलों के लिए युवा मतदाता और सोशल मीडिया उपयोगकर्ता लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ऐसे में छात्र संवाद और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं तक पहुंच बनाना अब राजनीतिक अभियानों का अहम हिस्सा बन गया है।
कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी का छात्रों के साथ संवाद भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था, उच्च शिक्षा और युवाओं से जुड़े अन्य मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है।
बीजेपी का आरोप है कि संवाद कार्यक्रम की आड़ में राहुल गांधी की राजनीतिक छवि मजबूत करने के लिए सोशल मीडिया प्रभाव का इस्तेमाल किया जा रहा है। पार्टी ने इसे युवाओं से वास्तविक संवाद के बजाय प्रचार अभियान बताया है।
कांग्रेस की ओर से जवाब का इंतजार
बीजेपी के आरोपों के बीच कांग्रेस की ओर से इन दावों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। राजनीतिक आयोजनों में सोशल मीडिया प्रचार और इन्फ्लुएंसर्स का इस्तेमाल अब आम होता जा रहा है, लेकिन भुगतान से जुड़े आरोपों को लेकर पारदर्शिता का सवाल महत्वपूर्ण है।
यदि बीजेपी द्वारा साझा की गई सामग्री और भुगतान संबंधी दावे सही पाए जाते हैं तो यह राजनीतिक प्रचार और डिजिटल इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के बीच संबंध को लेकर नई बहस को जन्म दे सकता है। वहीं, यदि आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण नहीं मिलते हैं तो यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह सकता है।
फिलहाल पुणे में होने वाला ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर राहुल गांधी के संवाद के साथ-साथ बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। कार्यक्रम में छात्रों की भागीदारी और उठाए जाने वाले मुद्दों के साथ अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर भी रहेगी कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को भुगतान किए जाने के बीजेपी के आरोपों पर कांग्रेस क्या जवाब देती है और कथित ऑडियो-वीडियो सामग्री की वास्तविकता क्या सामने आती है।