देवगढ़ फिशरीज कॉलेज का प्रस्ताव तैयार

Update: 2026-08-05 04:43 GMT

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार कोंकण क्षेत्र में मत्स्य पालन शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने मंगलवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ के अंतर्गत सिंधुदुर्ग जिले के देवगढ़ में एक नया मत्स्य पालन कॉलेज (Fisheries College) स्थापित करने का प्रस्ताव जल्द से जल्द तैयार कर प्रस्तुत किया जाए। इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा।

मंत्रालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने यह निर्देश दिए। बैठक में मत्स्य पालन और बंदरगाह मंत्री नितेश राणे सहित कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य कोंकण क्षेत्र में मत्स्य पालन शिक्षा, अनुसंधान और संबंधित बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की योजनाओं की समीक्षा करना था।

बैठक में देवगढ़ में प्रस्तावित मत्स्य पालन कॉलेज की स्थापना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने कॉलेज के लिए आवश्यक भूमि, स्थायी परिसर के निर्माण, शिक्षण और प्रशासनिक पदों के सृजन, वित्तीय व्यवस्था तथा शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार जैसे मुद्दों पर जानकारी दी।

कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि परियोजना से जुड़े सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक प्रस्ताव तैयार किया जाए, ताकि इसे जल्द से जल्द राज्य मंत्रिमंडल के सामने मंजूरी के लिए रखा जा सके।

कोंकण क्षेत्र महाराष्ट्र का एक महत्वपूर्ण तटीय इलाका है, जहां बड़ी संख्या में लोग मत्स्य पालन और इससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर हैं। ऐसे में देवगढ़ में मत्स्य पालन कॉलेज की स्थापना को क्षेत्र के युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के नए अवसर पैदा करने वाली पहल माना जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, नया कॉलेज स्थापित होने से मत्स्य पालन क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रशिक्षण को बढ़ावा मिलेगा। इससे मछुआरा समुदाय और इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को नई तकनीकों और बेहतर उत्पादन पद्धतियों की जानकारी मिल सकेगी।

बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि मत्स्य पालन क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार करना जरूरी है। कॉलेज के माध्यम से छात्रों को मत्स्य विज्ञान, जलीय कृषि, समुद्री संसाधनों के प्रबंधन और इससे जुड़े अन्य विषयों में उच्च शिक्षा उपलब्ध कराई जा सकेगी।

डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ पहले से ही कृषि और संबंधित क्षेत्रों में शिक्षा और अनुसंधान का प्रमुख केंद्र है। इसके अंतर्गत नया मत्स्य पालन कॉलेज शुरू होने से कोंकण क्षेत्र में कृषि और मत्स्य पालन से जुड़े अनुसंधान कार्यों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

बैठक में कॉलेज के स्थायी परिसर के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि भूमि उपलब्धता, आवश्यक सुविधाओं और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजना तैयार की जाए। इसके अलावा कॉलेज के संचालन के लिए आवश्यक शिक्षकों और कर्मचारियों के पदों के निर्माण पर भी विचार किया गया।

परियोजना के लिए वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था भी बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय रहा। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि प्रस्ताव में अनुमानित खर्च, आवश्यक बजट और चरणबद्ध तरीके से परियोजना को लागू करने की योजना को शामिल किया जाए।

मत्स्य पालन मंत्री नितेश राणे ने भी बैठक में इस पहल के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कोंकण क्षेत्र में मत्स्य पालन की अपार संभावनाएं हैं और इस क्षेत्र में शिक्षा तथा अनुसंधान को मजबूत करने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि मत्स्य पालन क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ने से उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।

महाराष्ट्र सरकार की यह पहल कोंकण क्षेत्र में मत्स्य पालन को एक संगठित और आधुनिक उद्योग के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। देवगढ़ में प्रस्तावित कॉलेज के जरिए शिक्षा, अनुसंधान और स्थानीय विकास के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।

फिलहाल कृषि विभाग के अधिकारियों को प्रस्ताव तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है। प्रस्ताव तैयार होने के बाद इसे राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि इस परियोजना को जल्द आगे बढ़ाकर कोंकण क्षेत्र के युवाओं और मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को इसका लाभ पहुंचाया जा सके।

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