फतेहपुर सीकरी में मुगलकालीन हमाम के संरक्षण की तैयारी, ASI ने भेजा प्रस्ताव

Update: 2026-05-31 09:55 GMT

Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: मुगल सम्राट अकबर की राजधानी रही फतेहपुर सीकरी में स्थित ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। यहां हिरन मीनार के पास स्थित प्राचीन हमाम (रुइंड बाथ) के संरक्षण और पुनरुद्धार का कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किया जाएगा। इस ऐतिहासिक संरचना को संरक्षित करने के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर एएसआई के दिल्ली मुख्यालय को भेज दिया गया है।

यह हमाम मुगलकालीन वास्तुकला का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है, जो समय के साथ उचित देखरेख और संरक्षण के अभाव में काफी क्षतिग्रस्त हो चुका है। वर्तमान स्थिति में यह ऐतिहासिक संरचना मलबे के ढेर में बदलती नजर आ रही है, जिससे इसके मूल स्वरूप को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

एएसआई द्वारा तैयार प्रस्ताव के अनुसार इस संरक्षण कार्य पर लगभग 30 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इस राशि का उपयोग संरचना की मरम्मत, मलबा हटाने, दीवारों को स्थिर करने और उसके मूल स्वरूप को संरक्षित करने में किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्य वैज्ञानिक और पुरातात्विक तकनीकों के आधार पर किया जाएगा, ताकि संरचना की ऐतिहासिक प्रामाणिकता बनी रहे।

संरक्षण योजना के तहत सबसे पहले हमाम परिसर से मलबा हटाने का कार्य किया जाएगा। लंबे समय से जमा हुए मलबे और अव्यवस्था के कारण संरचना के गिरने का खतरा बढ़ गया है। इसे ध्यान में रखते हुए संरचना को स्थिर करने और उसके ढांचे को सुरक्षित रखने के उपाय किए जाएंगे। इसके बाद धीरे-धीरे मरम्मत और संरक्षण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।

एएसआई के अधिकारियों के अनुसार, फतेहपुर सीकरी एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और यहां की हर संरचना ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए इस प्रकार के संरक्षण कार्य न केवल वास्तुकला को बचाने के लिए आवश्यक हैं, बल्कि यह इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने का माध्यम भी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस तरह की संरचनाओं का संरक्षण नहीं किया गया तो कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरें पूरी तरह नष्ट हो सकती हैं। इसी कारण एएसआई ने इस हमाम को प्राथमिकता के आधार पर संरक्षण सूची में शामिल किया है।

स्थानीय स्तर पर भी इस पहल का स्वागत किया जा रहा है। इतिहास और पुरातत्व से जुड़े लोगों का कहना है कि फतेहपुर सीकरी जैसे ऐतिहासिक स्थल पर इस तरह की संरचनाओं का संरक्षण आवश्यक है, ताकि मुगलकालीन वास्तुकला की विरासत सुरक्षित रह सके।

प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद संरक्षण कार्य शुरू किया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद यह प्राचीन हमाम अपने मूल स्वरूप में आ सकेगा और पर्यटकों व शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण आकर्षण का केंद्र बनेगा।

इस प्रकार, फतेहपुर सीकरी के हिरन मीनार क्षेत्र में स्थित मुगलकालीन हमाम का संरक्षण न केवल एक संरचनात्मक सुधार है, बल्कि यह भारत की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास भी माना जा रहा है।

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