नासिक। महाराष्ट्र के नासिक जिले में साइबर धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक निजी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी से ठगों ने करीब 90 लाख रुपये की ठगी कर ली। साइबर अपराधियों ने पीड़ित को आतंकवाद, मनी लॉन्ड्रिंग और जांच एजेंसियों का डर दिखाकर करीब 12 दिनों तक मानसिक दबाव में रखा।
इस तरह की ठगी को आमतौर पर “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम कहा जाता है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या सरकारी अधिकारी बताकर पीड़ित को डराते हैं और पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं।
बैंक खाते को आतंकवाद से जोड़कर डराया
जानकारी के अनुसार, पीड़ित की उम्र करीब 60 वर्ष है और वह नासिक की एक निजी कंपनी में वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं।
ठगी की शुरुआत कथित तौर पर 17 अगस्त को हुई, जब उन्हें एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि उनके पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल जम्मू में एक बैंक खाता खोलने के लिए किया गया है।
ठगों ने आरोप लगाया कि इस बैंक खाते का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया गया है और इसके संबंध आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।
यह सुनकर पीड़ित घबरा गए और ठगों के जाल में फंसते चले गए।
जांच एजेंसियों का अधिकारी बनकर की बातचीत
इसके बाद साइबर अपराधियों ने पीड़ित से व्हाट्सऐप ऑडियो और वीडियो कॉल के जरिए संपर्क करना शुरू किया।
ठगों ने खुद को एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS), पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताया।
उन्होंने पीड़ित को गिरफ्तार करने की धमकी दी और कहा कि वह किसी से संपर्क न करें और घर से बाहर न निकलें।
इस दौरान आरोपियों ने लगातार निगरानी रखने का नाटक किया, जिससे पीड़ित को लगा कि वह किसी गंभीर कानूनी मामले में फंस गए हैं।
12 दिनों तक बनाया मानसिक दबाव
पुलिस के अनुसार, ठगों ने पीड़ित को करीब 12 दिनों तक डर और तनाव की स्थिति में रखा।
आरोपियों ने उन्हें बताया कि जांच चल रही है और अगर उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इस डर के कारण पीड़ित ने ठगों के निर्देशों का पालन करना शुरू कर दिया।
साइबर अपराधियों ने इसी मानसिक दबाव का फायदा उठाकर उनसे बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली।
करीब 90 लाख रुपये की ठगी
ठगों ने अलग-अलग तरीकों से पीड़ित से करीब 90 लाख रुपये की राशि हासिल कर ली।
जब पीड़ित को बाद में एहसास हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है तो उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।
इसके बाद साइबर अपराध से जुड़े अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम में बढ़ोतरी
देशभर में पिछले कुछ समय से डिजिटल अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़े हैं।
इस तरह के मामलों में अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी, सीबीआई, ईडी, आरबीआई या अन्य सरकारी एजेंसियों का कर्मचारी बताकर लोगों को डराते हैं।
वे पीड़ितों को वीडियो कॉल पर फर्जी पूछताछ करते हैं और कहते हैं कि उनका नाम किसी अपराध से जुड़ा हुआ है।
इसके बाद गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे की मांग की जाती है।
पुलिस ने लोगों को किया सावधान
साइबर विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर घबराएं नहीं।
कोई भी सरकारी जांच एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए इस तरह गिरफ्तारी की धमकी नहीं देती और न ही किसी व्यक्ति से जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने को कहती है।
अगर कोई व्यक्ति इस तरह की धमकी देता है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत करनी चाहिए।
जांच में जुटी पुलिस
फिलहाल नासिक पुलिस मामले की जांच कर रही है और ठगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस कॉल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
यह घटना एक बार फिर बताती है कि साइबर अपराधी लोगों को डर और भ्रम में डालकर बड़ी ठगी को अंजाम दे रहे हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या वीडियो कॉल पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें और डर के कारण कोई आर्थिक फैसला न लें।
नासिक का यह मामला साइबर सुरक्षा को लेकर बढ़ती चुनौती को दर्शाता है और लोगों को डिजिटल धोखाधड़ी से सावधान रहने का संदेश देता है।