जालना। महाराष्ट्र के जालना जिले के अंतरवाली सराटी में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे कार्यकर्ता मनोज जारांगे पाटिल की मंगलवार को तबीयत बिगड़ गई। भूख हड़ताल के 11वें दिन उनकी हालत खराब होने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें नस के जरिए IV फ्लूइड दिया।

जानकारी के अनुसार, मंगलवार आधी रात के आसपास जारांगे पाटिल को चक्कर आने लगे और उनका ब्लड शुगर लेवल काफी नीचे चला गया। इसके बाद मौके पर मौजूद चिकित्सकों ने उनकी जांच की और जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई।

अचानक बिगड़ी तबीयत

मनोज जारांगे पाटिल मराठा आरक्षण की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।

भूख हड़ताल के 11वें दिन मंगलवार को उनकी स्वास्थ्य स्थिति प्रभावित हुई। डॉक्टरों के मुताबिक, लंबे समय से भोजन नहीं लेने के कारण उनके शरीर पर असर पड़ा है।

आधी रात के करीब उनकी तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिलने के बाद जालना के सिविल सर्जन ने मौके पर पहुंचकर उनकी स्वास्थ्य जांच की।

सात किलो वजन घटने की जानकारी

मेडिकल जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि लगातार भूख हड़ताल के कारण मनोज जारांगे पाटिल का वजन लगभग सात किलो कम हो गया है।

इसके अलावा उनका ब्लड शुगर लेवल भी काफी गिर गया था।

डॉक्टरों ने स्थिति को देखते हुए उन्हें IV फ्लूइड दिया, ताकि शरीर में जरूरी ऊर्जा और तरल पदार्थ की कमी को पूरा किया जा सके।

डॉक्टर लगातार कर रहे निगरानी

जारांगे पाटिल की स्वास्थ्य स्थिति पर डॉक्टरों की टीम लगातार नजर बनाए हुए है।

चिकित्सकों का कहना है कि लंबे समय तक उपवास करने से शरीर में कमजोरी, लो ब्लड शुगर और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

उनकी नियमित जांच की जा रही है और स्वास्थ्य में बदलाव के अनुसार उपचार दिया जा रहा है।

मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन

मनोज जारांगे पाटिल महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को आरक्षण देने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

उनका कहना है कि मराठा समाज के लोगों को शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।

इसी मांग को लेकर उन्होंने अंतरवाली सराटी में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की है।

समर्थकों की जुटी भीड़

जारांगे पाटिल के आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में समर्थक पहुंच रहे हैं।

उनके स्वास्थ्य को लेकर समर्थकों में चिंता बनी हुई है। आंदोलनकारी लगातार सरकार से मराठा आरक्षण के मुद्दे पर समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं।

सरकार और प्रशासन की नजर

मनोज जारांगे पाटिल की तबीयत बिगड़ने के बाद प्रशासन भी सक्रिय हो गया है।

अधिकारियों की ओर से आंदोलन स्थल की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है।

प्रशासन की कोशिश है कि जारांगे पाटिल के स्वास्थ्य को लेकर कोई गंभीर स्थिति न बने।

आंदोलन पर बढ़ी चिंता

लंबे समय तक चल रही भूख हड़ताल के कारण अब आंदोलन के स्वास्थ्य पहलू को लेकर चिंता बढ़ने लगी है।

डॉक्टरों का कहना है कि लगातार उपवास से शरीर के कई अंगों पर असर पड़ सकता है, इसलिए स्वास्थ्य की नियमित निगरानी जरूरी है।

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