MPSC भर्ती विवाद में बड़ा कदम, 5 सदस्यीय जांच समिति गठित
महाराष्ट्र सरकार ने बनाई समिति
पुणे: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की भर्ती प्रक्रिया में सुधार और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग को लेकर चल रहे अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को पांच सदस्यीय समिति गठित करने की घोषणा की। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे को समिति का सचिव नियुक्त किया गया है। समिति की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले करेंगे। यह फैसला पुणे में पिछले दस दिनों से चल रहे अभ्यर्थियों के विरोध प्रदर्शन के बाद लिया गया है।
दस दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे अभ्यर्थी
पुणे के एसएम जोशी पुल पर बड़ी संख्या में एमपीएससी परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। उनका आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में कई समस्याएं हैं, जिनका समाधान जरूरी है।
अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, कथित पेपर लीक की जांच, रिक्त सरकारी पदों पर भर्ती और आयोग के कामकाज में सुधार की मांग उठाई थी। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार को पद से हटाने की मांग भी की। आंदोलन में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।राज्य सरकार की ओर से मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने पहुंचे। उन्होंने अभ्यर्थियों की मांगों पर सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।
पांच सदस्यीय समिति में शामिल होंगे ये अधिकारी
राज्य सरकार की ओर से गठित समिति में प्रशासनिक और न्यायिक क्षेत्र के अनुभवी व्यक्तियों को शामिल किया गया है। समिति की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले करेंगे। इसके सचिव तुकाराम मुंढे होंगे। अन्य सदस्यों में आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी गौतम, पूर्व आईएएस अधिकारी गणेश पाटिल और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी.डी. नाईक शामिल हैं। समिति को एमपीएससी की वर्तमान कार्यप्रणाली की समीक्षा करने और सुधार के लिए आवश्यक सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
दो महीने में जांच पूरी करने का लक्ष्य
सरकार ने समिति को अपनी जांच और समीक्षा पूरी करने के लिए दो महीने का समय देने की बात कही है। इस अवधि में समिति एमपीएससी की कार्यप्रणाली, परीक्षा आयोजन और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ी समस्याओं का अध्ययन करेगी। समिति कथित पेपर लीक के मामलों और परीक्षा प्रक्रिया में सामने आई शिकायतों की भी जांच करेगी। इसके बाद आवश्यक सुधारों के संबंध में अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी। इस प्रक्रिया में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए किन व्यवस्थाओं में बदलाव की आवश्यकता है।
तीन वर्षों में 70 हजार पदों पर भर्ती की मांग
आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में अगले तीन वर्षों के दौरान 70 हजार सरकारी पदों पर भर्ती करना शामिल है। मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि सरकार इस मांग सहित अन्य मुद्दों पर कार्रवाई करेगी। अभ्यर्थियों ने जनवरी 2027 में प्रस्तावित समूह-सी परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग भी रखी है। इसके अतिरिक्त भर्ती परीक्षाओं का नियमित कार्यक्रम घोषित करने और चयन प्रक्रिया में देरी कम करने जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। 70 हजार पदों पर भर्ती की मांग और सरकार के आश्वासन को सभी पदों के लिए भर्ती अधिसूचना जारी होने के बराबर नहीं माना जा सकता। संबंधित विभागों की आधिकारिक घोषणाओं से ही भर्ती की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
आंदोलनकारियों पर दर्ज मामले वापस लेने का आश्वासन
महाराष्ट्र सरकार ने आंदोलन में शामिल कुछ अभ्यर्थियों और प्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग पर भी सकारात्मक रुख दिखाया है। मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की अन्य मांगों का भी समाधान किया जाएगा। सरकार ने अभ्यर्थियों की ओर से दिए गए मांगपत्र के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार किया है। इस निर्णय से आंदोलन में शामिल अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, मामलों को वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया और संबंधित आदेशों के आधार पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार छुट्टी पर जाएंगे
एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार को हटाने की मांग आंदोलन का एक प्रमुख मुद्दा रही है। समिति के गठन की घोषणा के समय उनके पद को लेकर सरकार का निर्णय स्पष्ट नहीं था। सोमवार, 12 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के अनुसार, विवेक भीमनवार ने जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने का निर्णय लिया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि राज्य सरकार ने कथित पेपर लीक मामले की न्यायिक जांच की घोषणा की है। ऐसे में उन्होंने जांच के दौरान पद का कामकाज संभालने के बजाय छुट्टी पर रहने का फैसला किया है। भीमनवार ने आयोग की स्वायत्तता, विश्वसनीयता और अभ्यर्थियों के हितों को अपनी प्राथमिकता बताया है। उनका छुट्टी पर जाना पद से स्थायी रूप से हटाए जाने के समान नहीं है।
रोहित पवार ने किया फैसले का स्वागत
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार भी अभ्यर्थियों के आंदोलन का समर्थन कर रहे थे। उन्होंने समिति में तुकाराम मुंढे को शामिल किए जाने का स्वागत किया। साथ ही उम्मीद जताई कि समिति को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलेगा। आंदोलन के दौरान कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम भी मौजूद रहे। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत में विभिन्न मांगों को लेकर चर्चा हुई।
अब समिति की सिफारिशों पर रहेगी नजर
महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले के बाद एमपीएससी की भर्ती प्रणाली में सुधार की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। समिति को परीक्षा प्रणाली की समीक्षा करने, शिकायतों की जांच करने और सुधार के सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है। अभ्यर्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय निष्पक्ष परीक्षा, समय पर परिणाम और रिक्त पदों पर भर्ती है। अब देखना होगा कि दो महीने की निर्धारित अवधि में समिति किन समस्याओं की पहचान करती है और सरकार उसकी सिफारिशों पर क्या निर्णय लेती है। फिलहाल पांच सदस्यीय समिति के गठन, तुकाराम मुंढे की सचिव पद पर नियुक्ति और एमपीएससी अध्यक्ष के छुट्टी पर जाने के फैसले से भर्ती विवाद में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है।