मुंबई : डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) की मुंबई यूनिट ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बेंगलुरु की एक निजी कंपनी के 25 वर्षीय पार्टनर को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने सामान के कंट्री ऑफ ओरिजिन यानी निर्माण देश की गलत जानकारी देकर करीब 4.77 करोड़ रुपये की एंटी-डंपिंग ड्यूटी (ADD) से बचने की कोशिश की।
DRI अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर चीन में बने सामान को मलेशिया में निर्मित बताकर भारत में आयात किया। जांच एजेंसी को शक है कि आयातित केमिकल वास्तव में चीन में तैयार किया गया था, लेकिन उसे मलेशिया के रास्ते भारत भेजा गया ताकि एंटी-डंपिंग ड्यूटी से बचा जा सके।
DRI सूत्रों के अनुसार, इस मामले का खुलासा खुफिया जानकारी के आधार पर हुआ। एजेंसी को जानकारी मिली थी कि एक पार्टनरशिप फर्म ने ट्राइक्लोरोआइसोसाइन्यूरिक एसिड (TCCA) केमिकल के आयात में नियमों का उल्लंघन किया है। इसके बाद अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू की।
जांच में सामने आया कि TCCA केमिकल पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लागू होने के बाद संबंधित फर्म ने चीन से सीधे आयात करने के बजाय मलेशिया की एक कंपनी से सामान मंगाना शुरू कर दिया था। फर्म पहले अपनी सहयोगी कंपनी के माध्यम से चीन से TCCA का आयात करती थी।
DRI अधिकारियों ने जब दस्तावेजों और आयात से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। जांच एजेंसी के मुताबिक, जिस मलेशियाई कंपनी से TCCA आयात किया जा रहा था, वह वास्तव में इस केमिकल की निर्माता कंपनी नहीं थी। एजेंसी को संदेह है कि सामान चीन में तैयार किया गया और केवल कागजों में मलेशिया का नाम दिखाकर भारत भेजा गया।
DRI का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए आरोपी और उसकी फर्म ने सरकार को मिलने वाली एंटी-डंपिंग ड्यूटी का भुगतान नहीं किया। इससे सरकारी राजस्व को लगभग 4.77 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका जताई गई है।
एंटी-डंपिंग ड्यूटी किसी देश से बहुत कम कीमत पर आयात किए जा रहे सामान से घरेलू उद्योग को बचाने के लिए लगाई जाती है। जब किसी देश के उत्पाद बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर दूसरे देश में बेचे जाते हैं, तो सरकार उस पर अतिरिक्त शुल्क लगा सकती है। इसका उद्देश्य घरेलू निर्माताओं को अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाना होता है।
DRI ने इस मामले में आरोपी पार्टनर को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित आयात नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।
जांच के दौरान आयात दस्तावेजों, कंपनी के रिकॉर्ड और व्यापारिक लेनदेन की भी जांच की जा रही है। DRI यह भी पता लगा रही है कि क्या इसी तरीके से पहले भी अन्य खेप भारत लाई गई थीं और क्या उनमें भी शुल्क चोरी की गई।
अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कंट्री ऑफ ओरिजिन की गलत जानकारी देना गंभीर उल्लंघन माना जाता है। इससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान होता है, बल्कि व्यापार नियमों का भी उल्लंघन होता है।
DRI की कार्रवाई को आयात शुल्क चोरी और गलत जानकारी देकर व्यापार करने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। एजेंसी लगातार ऐसे मामलों पर नजर रख रही है, जहां विदेशी सामान की वास्तविक उत्पत्ति छिपाकर भारत में आयात किया जाता है।
फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद इस मामले में और गिरफ्तारियां या अन्य कार्रवाई होने की संभावना है।