महाराष्ट्र: अनिल देशमुख ने सीबीआइ चार्जशीट को बताया 'अपूर्ण', मांगी 'डिफाल्ट जमानत'
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मुंबई। महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने भ्रष्टाचार के मामले में अपने विरुद्ध पेश केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) के आरोपपत्र को 'अपूर्ण' बताते हुए विशेष अदालत से 'डिफाल्ट जमानत' की मांग की है। गौरतलब है कि अनिल देशमुख के खिलाफ सीबीइ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर रही है। सीबीआइ पिछले वर्ष से ही मुंबई उच्च न्यायालय के आदेश पर अनिल देशमुख और उनके दो सहयोगियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर रही है। पिछले सप्ताह ही उसने इन तीनों के खिलाफ विशेष सीबीआइ अदालत में 59 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया है। इस आरोपपत्र को अपूर्ण बताते हुए अनिल देशमुख के वकीलों इंद्रपाल सिंह व अनिकेत निकम ने उनके लिए डिफाल्ट जमानत की मांग की है। डिफाल्ट जमानत आरोप पत्र दाखिल करने में चूक के कारण मांगी जाती है।
याचिका में कही ये बात
अनिल देशमुख के वकीलों ने याचिका में कहा कि आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) 173 के तहत अनिवार्य अंतिम व पूर्ण आरोप पत्र दाखिल किए बगैर आरोप पत्र के नाम पर सिर्फ 59 पृष्ठों का एक संकलन पेश कर देने से याचिकाकर्ता के डिफाल्ट जमानत के कानूनी अधिकार को छीना नहीं जा सकता है। सीआरपीसी की धारा 173 किसी मामले में जांच पूरी होने पर पुलिस अधिकारी द्वारा पेश की जाने वाली रिपोर्ट से संबंधित धारा है। अनिल देशमुख के विरुद्ध सीबीआइ जांच का आदेश मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह की एक याचिका के बाद दिया था। परमबीर सिंह ने पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों से मुंबई के रेस्टोरेंट व बारों से 100 करोड़ रुपये प्रतिमाह वसूली करने को कहा। परमबीर सिंह ने अनिल देशमुख पर पुलिस अधिकारियों की ट्रांस्फर व पोस्टिंग में भी हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था। सीबीआइ द्वारा अनिल देशमुख की जांच शुरू किए जाने के कुछ दिनों बाद ही एक और केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी उनके विरुद्ध जांच शुरू कर दी थी। बाद में ईडी द्वारा ही अनिल देशमुख की उनके दो सहयोगियों संजीव पलांडे व कुंदन शिंदे के साथ गिरफ्तारी भी कर ली गई। फिलहाल, ये तीनों न्यायिक हिरासत में मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद हैं। तीनों के विरुद्ध ईडी भी आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।