Jalgaon : जंगलों में तीन बाघों की मौजूदगी दर्ज, ‘बनाना टाइगर ज़ोन’ बना वाइल्डलाइफ आकर्षण का केंद्र
Maharashtra महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के जलगांव जिले के जंगलों में बाघों की मौजूदगी की पुष्टि होने से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित हुआ है। हाल ही में हुई वाइल्डलाइफ सेंसस के दौरान फॉरेस्ट विभाग ने तीन बाघों की उपस्थिति दर्ज की है, जिससे इस क्षेत्र में वन्यजीव गतिविधियों की पुष्टि हुई है।
जानकारी के अनुसार, 1 मई को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित वाइल्डलाइफ सेंसस के दौरान जलगांव फॉरेस्ट डिवीजन के अंतर्गत वडोदा-चरथाना इलाके में इन तीन बाघों को रिकॉर्ड किया गया। यह इलाका अपनी घनी वनस्पति और कृषि भूमि के कारण पहले से ही वन्यजीवों के लिए उपयुक्त माना जाता रहा है।
वडोदा-चरथाना बेल्ट को स्थानीय लोग और वन विभाग “बनाना टाइगर ज़ोन” के नाम से भी जानते हैं। इसका कारण यहां बड़े पैमाने पर केले की खेती, घने पेड़-पौधे और पानी की पर्याप्त उपलब्धता है, जो बाघों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं। इस क्षेत्र में पहले भी कई बार केले के बागानों में बाघों को घूमते और आराम करते देखा गया है।
वन विभाग के अधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस इलाके में लगभग 6 से 7 बाघों के रहने की संभावना जताई जाती रही है, लेकिन हालिया सेंसस में तीन बाघों की आधिकारिक पुष्टि ने उनकी मौजूदगी को प्रमाणित कर दिया है। इससे वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को भी नई दिशा मिली है।
हालांकि इस सकारात्मक संकेत के बावजूद, पर्यावरण और वन्यजीव विशेषज्ञों ने कुछ चिंताएं भी जताई हैं। उनका कहना है कि जलगांव फॉरेस्ट डिवीजन में बाघों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने और जल स्रोतों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि क्षेत्र में तापमान लगातार बढ़ रहा है और हाल ही में गर्मी 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गई है। ऐसे में बाघों और अन्य वन्यजीवों के लिए पानी और सुरक्षित आवास की उपलब्धता बेहद जरूरी हो जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाघों की मौजूदगी से क्षेत्र में उत्साह जरूर बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही सुरक्षा और जागरूकता भी जरूरी है ताकि मानव और वन्यजीव संघर्ष की स्थिति न बने।
वन विभाग ने संकेत दिया है कि क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई जाएगी और बाघों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी। इसके साथ ही जल स्रोतों के संरक्षण और जंगलों के बेहतर प्रबंधन पर भी काम किया जाएगा।
कुल मिलाकर जलगांव के जंगलों में बाघों की पुष्टि ने एक ओर जहां वन्यजीव संरक्षण की उम्मीदें बढ़ाई हैं, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण की चुनौतियों को भी उजागर किया है।