मुंबई। महाराष्ट्र के बदलापुर में सामने आए कथित अवैध मानव अंडाणु निकालने और बेचने के रैकेट की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) तक पहुंच गई है। मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ठाणे, बारामती और नासिक में अस्पतालों तथा आईवीएफ सेंटरों सहित कुल 10 ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान जांच एजेंसी ने 29 लाख रुपये नकद जब्त किए हैं। इसके अलावा कई बैंक लॉकर और म्यूचुअल फंड निवेश फ्रीज किए गए हैं। छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी बरामद हुए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
ईडी की मुंबई जोनल ऑफिस-दो की टीम ने 16 अक्टूबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत यह कार्रवाई की थी। एजेंसी ने 22 अक्टूबर को जारी बयान में छापेमारी और जब्ती की जानकारी दी। मामला आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को पैसों का लालच देकर कथित तौर पर बार-बार अंडाणु निकलवाने और उन्हें विभिन्न प्रजनन केंद्रों तक पहुंचाने से जुड़ा है।
तीन शहरों में 10 ठिकानों पर छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय ने महाराष्ट्र के ठाणे, बारामती और नासिक में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। जिन स्थानों पर कार्रवाई की गई, उनमें अस्पताल, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी आईवीएफ सेंटर और मामले से जुड़े अन्य परिसर शामिल थे।जांच एजेंसी के मुताबिक, इन ठिकानों से वित्तीय लेनदेन से संबंधित दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री मिली है।
ईडी ने 29 लाख रुपये नकद जब्त करने के साथ बैंक लॉकर और म्यूचुअल फंड निवेश को फ्रीज किया है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अवैध गतिविधियों से कितनी रकम अर्जित की गई और उसका इस्तेमाल कहां किया गया।
मंजुषा वानखेड़े समेत 17 लोगों पर मामला
यह मामला ठाणे जिले के बदलापुर पूर्व पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है।पुलिस ने मंजुषा वानखेड़े और 16 अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी तथा प्रजनन तकनीक से संबंधित कानूनों के कथित उल्लंघन के आरोपों में मामला दर्ज किया था।इसके बाद पुलिस ने जांच पूरी कर आरोपपत्र भी दाखिल किया।इसी मामले के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की है।आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं के अलावा असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के कथित उल्लंघन की जांच की जा रही है।
गरीब महिलाओं को पैसों का लालच देने का आरोप
जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, इस कथित रैकेट के संचालक आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को निशाना बनाते थे।महिलाओं को अंडाणु दान करने के बदले 25 हजार से 30 हजार रुपये तक देने की पेशकश की जाती थी।इसके बाद एजेंट उन्हें विभिन्न आईवीएफ सेंटरों और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) बैंकों तक पहुंचाते थे।
आरोप है कि महिलाओं की आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे बार-बार अंडाणु निकलवाए गए।इस पूरी प्रक्रिया में बिचौलियों को भी कमीशन मिलने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी अब इन एजेंटों और संबंधित चिकित्सा संस्थानों के बीच आर्थिक संबंधों की पड़ताल कर रही है।
फर्जी आधार कार्ड और मेडिकल रिपोर्ट का इस्तेमाल
ईडी की जांच में दस्तावेजों की कथित जालसाजी का मामला भी सामने आया है।एजेंसी के अनुसार, महिलाओं की पहचान छिपाने और बार-बार अंडाणु दान कराने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे।इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र, सहमति पत्र, शपथपत्र, ब्लड टेस्ट रिपोर्ट और बीमा संबंधी दस्तावेज शामिल हैं।आरोप है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल महिलाओं को चिकित्सकीय रूप से योग्य दिखाने और उनकी पिछली प्रक्रियाओं का रिकॉर्ड छिपाने के लिए किया गया।यदि ये आरोप साबित होते हैं, तो यह प्रजनन चिकित्सा से जुड़े सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन होगा।
40 से ज्यादा महिलाओं के शोषण की आशंका
मामले की शुरुआती पुलिस जांच में 40 से अधिक महिलाओं के कथित शोषण की आशंका सामने आई थी।आरोप है कि कुछ महिलाओं को निर्धारित सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए बार-बार अंडाणु निकालने की प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा।एक महिला से कथित तौर पर 33 बार अंडाणु निकलवाने का मामला भी जांच में सामने आया है।पुलिस के अनुसार, महिलाओं को प्रक्रिया से पहले हार्मोन संबंधी इंजेक्शन दिए जाते थे और उनकी सोनोग्राफी कराई जाती थी।इसके बाद चिकित्सा रिपोर्ट संबंधित केंद्रों को भेजी जाती थी।हालांकि, प्रत्येक मामले में महिलाओं की वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति और संबंधित चिकित्सा प्रक्रियाओं की वैधता की जांच आवश्यक है।
शिकायत के बाद सामने आया था पूरा मामला
कथित रैकेट का खुलासा तब हुआ, जब एक महिला ने अंडाणु दान की प्रक्रिया के बाद वादा की गई रकम नहीं मिलने की शिकायत की।इसके बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।जांच के दौरान बदलापुर में एक महिला के आवास पर कार्रवाई की गई, जहां से हार्मोन संबंधी इंजेक्शन और सिरिंज बरामद होने की जानकारी सामने आई।पुलिस ने मामले से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की और संबंधित चिकित्सा संस्थानों की भूमिका की जांच शुरू की।मई 2026 में पुलिस ने इस मामले में लगभग पांच हजार पन्नों का आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया था।
महिलाओं की सेहत के लिए गंभीर खतरा
चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार, अंडाणु निकालने की प्रक्रिया प्रशिक्षित विशेषज्ञों की देखरेख में और निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार ही की जानी चाहिए।इस प्रक्रिया में हार्मोनल दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है, जिनके कारण कुछ महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।बार-बार या अनुचित तरीके से प्रक्रिया किए जाने पर जोखिम बढ़ सकता है।इसीलिए भारत में एआरटी कानून के तहत अंडाणु दान, दाता की पात्रता और चिकित्सा संस्थानों के लिए नियम निर्धारित किए गए हैं।
संपत्तियों और निवेश की भी जांच
ईडी ने छापेमारी के दौरान कथित नेटवर्क से जुड़ी कई अचल संपत्तियों और निवेशों की जानकारी मिलने की बात कही है।जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों और बिचौलियों के बीच रकम का लेनदेन किस प्रकार होता था।इसके अलावा आईवीएफ सेंटरों को किए गए भुगतान और महिलाओं तक पहुंचाई गई रकम का भी मिलान किया जा रहा है।ईडी ने कुछ नए डोनर एजेंटों की पहचान भी की है, जिनकी भूमिका की जांच जारी है।
आगे बढ़ सकती है जांच
इस मामले में अब पुलिस की आपराधिक जांच के साथ ईडी की वित्तीय जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है।एजेंसी को मिले डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की जांच से कथित नेटवर्क के आर्थिक लेनदेन के बारे में अधिक जानकारी मिलने की संभावना है।हालांकि, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।