मुंबई: इंडियन कोस्ट गार्ड (ICG) के पश्चिमी क्षेत्र का ‘स्टेशन कमांडर्स वर्क्स कॉन्फ्रेंस 2026’ मुंबई में आयोजित किया गया। तीन दिन तक चली इस महत्वपूर्ण बैठक में समुद्री कानून लागू करने वाली एजेंसी की ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा की गई और समुद्री क्षेत्र में आने वाली प्रमुख चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतिक उपायों पर चर्चा की गई।

यह कॉन्फ्रेंस इंडियन कोस्ट गार्ड के क्षेत्रीय मुख्यालय मुंबई में 19 से 21 अगस्त तक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता पश्चिमी क्षेत्र के कमांडर इंस्पेक्टर जनरल भीष्म शर्मा ने की। इस दौरान समुद्री सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था, संसाधनों की उपलब्धता और भविष्य की तैयारियों को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

कॉन्फ्रेंस में पश्चिमी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इसमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा और केरल राज्यों के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के डिस्ट्रिक्ट कमांडर्स भी शामिल हुए। इसके अलावा क्षेत्र के सभी प्रमुख स्टेशन कमांडर्स, कमांडिंग ऑफिसर्स, ऑफिसर-इन-चार्ज, सुपरिटेंडेंट्स, चीफ इंजीनियर्स और संबंधित एमईएस अधिकारियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।

बैठक का मुख्य उद्देश्य समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाना तथा बदलती परिस्थितियों के अनुसार कोस्ट गार्ड की तैयारियों की समीक्षा करना था। अधिकारियों ने समुद्री निगरानी, आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता और तटीय सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

इंडियन कोस्ट गार्ड देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह संगठन समुद्री कानूनों को लागू करने, तस्करी रोकने, समुद्री प्रदूषण नियंत्रण, खोज और बचाव अभियान तथा तटीय क्षेत्रों की निगरानी जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य करता है। ऐसे में समय-समय पर होने वाली इस तरह की बैठकों में ऑपरेशनल क्षमता को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाता है।

कॉन्फ्रेंस के दौरान समुद्री क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों को लेकर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने समुद्री गतिविधियों में वृद्धि, अवैध गतिविधियों पर रोक, तटीय सुरक्षा को मजबूत करने और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखे।

बैठक में यह भी समीक्षा की गई कि समुद्री सुरक्षा अभियानों को और प्रभावी बनाने के लिए किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है। अधिकारियों ने संसाधनों के बेहतर उपयोग, उपकरणों के रखरखाव और कर्मियों की कार्यक्षमता बढ़ाने को लेकर भी चर्चा की।

पश्चिमी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला समुद्री क्षेत्र रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। अरब सागर से जुड़े इस क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियां बड़ी मात्रा में होती हैं। ऐसे में समुद्री सुरक्षा बनाए रखना और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना बेहद जरूरी है।

कॉन्फ्रेंस में शामिल अधिकारियों ने समुद्री सुरक्षा को लेकर आपसी समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया। विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल से तटीय सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है।

इंस्पेक्टर जनरल भीष्म शर्मा ने बैठक के दौरान अधिकारियों को बदलती समुद्री चुनौतियों के लिए हमेशा तैयार रहने और बेहतर समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार समीक्षा और सुधार जरूरी है।

तीन दिवसीय इस कॉन्फ्रेंस में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इसमें वर्तमान ऑपरेशनल स्थिति की समीक्षा के साथ-साथ भविष्य की योजनाओं और रणनीतियों पर भी विचार किया गया। बैठक के माध्यम से कोस्ट गार्ड अधिकारियों को अपने अनुभव साझा करने और नई चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर रणनीति तैयार करने का अवसर मिला।

इंडियन कोस्ट गार्ड लगातार समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है। मुंबई में आयोजित यह कॉन्फ्रेंस पश्चिमी समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा तैयारियों को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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