मुंबई: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने दशहरा रैली के मंच से उद्धव ठाकरे, कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की तुलना दस मुंहों वाले रावण से करते हुए उसका पुतला जलाने की बात कही। शिंदे ने विपक्ष के वोट चोरी संबंधी आरोपों को लेकर पलटवार किया और वर्ष 2019 में महाराष्ट्र में सरकार गठन का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि असली जनादेश की चोरी तब हुई थी, जब अविभाजित शिवसेना ने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ सरकार बनाई थी। 
मंगलवार, 20 अक्टूबर को मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को परिसर में आयोजित रैली में शिंदे ने कहा कि शिवसेना ने भाजपा के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा था। चुनाव के बाद अलग राजनीतिक गठबंधन बनाकर सरकार बनाने के फैसले को उन्होंने मतदाताओं के भरोसे के साथ विश्वासघात बताया। उद्धव ठाकरे को निशाने पर लेते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने के तरीके पर सवाल उठाए। शिंदे ने आरोप लगाया कि चुनाव लड़े बिना मुख्यमंत्री बनना और सहयोगी बदलकर सत्ता हासिल करना लोगों के जनादेश के खिलाफ था।
मतदाता सूची में गड़बड़ी के विपक्ष के आरोपों पर भी शिंदे ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले मतदाताओं की संख्या बढ़ने पर आपत्ति कर रहा था और अब नाम हटाए जाने को मुद्दा बना रहा है। इसे दोहरा मापदंड बताते हुए उन्होंने विपक्ष की राजनीति की आलोचना की। कांग्रेस पर हमला करते हुए शिंदे ने आरोप लगाया कि पहले बूथों पर कब्जे के जरिए चुनाव जीतने वाली पार्टी अब मतपत्रों से मतदान कराने की मांग कर रही है। ये आरोप उन्होंने अपने राजनीतिक संबोधन के दौरान लगाए। 
शिंदे ने विपक्ष से पूछा कि तेलंगाना, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में उसकी जीत के समय वोट चोरी के सवाल क्यों नहीं उठाए गए। उनका कहना था कि चुनाव हारने पर प्रक्रिया पर संदेह करना उचित नहीं है। उन्होंने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप भी लगाया। मुख्य चुनाव आयुक्त के निर्वाचन की मांग पर तंज कसते हुए उन्होंने पूछा कि क्या आगे मुख्य न्यायाधीश और नगर निगम प्रमुखों के लिए भी इसी तरह चुनाव की मांग की जाएगी। 
अपने भाषण में शिंदे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष के आंदोलनों की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष युवाओं को गुमराह कर देश में अराजकता का माहौल बनाना चाहता है। पड़ोसी देशों में सत्ता परिवर्तन के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में सरकार का फैसला जनता करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ इस्तेमाल की जा रही भाषा पर भी उन्होंने आपत्ति जताई तथा विपक्षी नेताओं के बयानों की आलोचना की। 
राजनीतिक आरोपों के साथ शिंदे ने राज्य के सूखे से प्रभावित किसानों की मदद का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने दशहरा रैली किसानों को समर्पित करते हुए कहा कि सरकार और उनकी पार्टी संकट की घड़ी में उनके साथ खड़ी हैं। शिंदे ने भरोसा दिलाया कि प्रभावित किसानों की दीपावली अंधेरे में नहीं गुजरने दी जाएगी। उन्होंने पांच हजार रुपये की अंतरिम राहत और राशन सामग्री भेजे जाने का उल्लेख किया। किसानों से उम्मीद नहीं छोड़ने की अपील भी की। 
शिंदे ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपने क्षेत्रों में रहकर किसानों तक सहायता पहुंचाने को कहा। उन्होंने किसानों के बच्चों के सामूहिक विवाह आयोजित करने की बात भी कही। उनका कहना था कि सरकारी मदद जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचनी चाहिए और कार्यकर्ताओं को इसके लिए लगातार काम करना होगा। प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से बातचीत का उल्लेख करते हुए उन्होंने दावा किया कि केंद्र ने भी महाराष्ट्र के किसानों के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया है। 
उधर, शिवाजी पार्क में अपनी दशहरा रैली को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने किसानों की परेशानियों, मतदाता सूची और महाराष्ट्र की पहचान के मुद्दों पर सरकार को घेरा। उन्होंने राहत पैकेज और कर्जमाफी के लाभ को लेकर सवाल किए। सत्ता परिवर्तन की चर्चा पर शिंदे ने जवाब दिया कि सरकार किसकी बनेगी, यह जनता तय करती है। दोनों नेताओं की अलग-अलग रैलियों में किसानों की स्थिति और चुनाव प्रक्रिया प्रमुख विषय रहे, जबकि वर्ष 2019 के राजनीतिक फैसलों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप ने दशहरे के मंच पर सियासी टकराव तेज कर दिया।
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