शरिया कानून चाहिए तो दूसरे देश जाएं', यूसीसी पर नितेश राणे की टिप्पणी

Update: 2026-06-23 15:23 GMT
Mumbai मुंबई। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच महाराष्ट्र सरकार के मंत्री Nitesh Rane नितेश राणे ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग भारतीय संविधान को मानते हैं, वे समान नागरिक संहिता का विरोध नहीं कर सकते। उनका कहना है कि संविधान में उल्लिखित प्रावधानों को लागू करना सरकार की जिम्मेदारी है।
मीडिया से बातचीत के दौरान नितेश राणे ने कहा कि भारतीय संविधान में समान नागरिक संहिता का उल्लेख किया गया है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति संविधान का सम्मान और पालन करने की बात करता है, तो उसे यूसीसी का विरोध नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान में जो भी प्रावधान हैं, उन्हें लागू किया जाना चाहिए। मंत्री ने कहा कि यदि किसी को शरिया कानून की व्यवस्था चाहिए, तो उसे उन देशों में जाना चाहिए जहां इस प्रकार की व्यवस्था लागू है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत का शासन संविधान के अनुसार चलता है और देश में वही व्यवस्था लागू होगी जो संविधान में निर्धारित है।
नितेश राणे का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में समान नागरिक संहिता को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है। यूसीसी के समर्थक इसे समानता और एकरूपता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हैं, जबकि विरोधी इसे धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता से जुड़ा मुद्दा मानते हैं। मंत्री के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। विभिन्न दलों और संगठनों की ओर से इस विषय पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना जताई जा रही है। यूसीसी का मुद्दा आगामी समय में भी राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है।
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