अमरावती। महाराष्ट्र के अमरावती स्थित जिला महिला अस्पताल में सोमवार तड़के हुए दर्दनाक अग्निकांड में तीन नवजात शिशुओं की मौत हो गई। घटना अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में हुई, जहां समय से पहले जन्मे और गंभीर हालत वाले बच्चों का इलाज चल रहा था। हादसे के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

मुख्यमंत्री ने हादसे को बेहद दुखद और दिल दहला देने वाला बताया। उन्होंने मृत नवजातों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए सरकार की ओर से हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। राज्य सरकार ने मृत बच्चों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की है। साथ ही घायल अथवा प्रभावित बच्चों के इलाज का खर्च सरकार की ओर से उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

तड़के करीब 3.15 बजे NICU में लगी आग

अधिकारियों के अनुसार, आग सोमवार तड़के करीब 3.15 बजे अस्पताल की तीसरी मंजिल स्थित NICU में लगी। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, नवजातों के एक सेक्शन में लगे वेंटिलेटर में अचानक आग लगी, जिसके बाद देखते ही देखते धुआं और आग फैल गई। घटना के समय यूनिट में कुल 39 नवजात भर्ती थे।

आग लगने की सूचना मिलते ही अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। गंभीर हालत में भर्ती नवजातों को सुरक्षित निकालना बड़ी चुनौती थी। अस्पताल कर्मियों ने उपकरणों को डिस्कनेक्ट कर बच्चों को प्रभावित हिस्से से बाहर निकालने का प्रयास किया।

36 नवजातों को सुरक्षित निकाला गया

पुलिस और प्रशासन के मुताबिक, आग की चपेट में आए NICU से 36 अन्य नवजातों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। उन्हें दूसरे अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया, ताकि उनका उपचार जारी रह सके। हालांकि तीन नवजातों को बचाया नहीं जा सका। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बच्चों की मौत आग और धुएं के कारण हुई।

घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। प्रभावित बच्चों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। प्रशासन की ओर से अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और आग लगने की परिस्थितियों की भी जांच शुरू कर दी गई है।

वेंटिलेटर से आग लगने की आशंका

प्रारंभिक जांच में आग की शुरुआत वेंटिलेटर से होने की बात सामने आई है। अमरावती पुलिस आयुक्त राकेश ओला के मुताबिक, आउटबॉर्न बच्चों वाले हिस्से में लगे एक वेंटिलेटर में आग लगी थी। हालांकि आग लगने का वास्तविक कारण क्या था, इसकी पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही होगी।

अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह पता लगाना है कि चिकित्सा उपकरण में किस तरह की खराबी आई और क्या आग को शुरुआती स्तर पर नियंत्रित करने वाली व्यवस्था ने अपेक्षित तरीके से काम किया।

फायर ऑडिट को लेकर भी जांच

हादसे के बाद अस्पताल की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अमरावती जिला प्रशासन ने कहा है कि अस्पताल में नियमित फायर ऑडिट हुए थे और इस वर्ष के ऑडिट के लिए भी आवेदन किया गया था। प्रशासन ने अनिवार्य अग्नि सुरक्षा जांच नहीं होने की बात से इनकार किया है। अब जांच का ध्यान उस उपकरण पर केंद्रित किया जा रहा है, जिससे आग शुरू होने की आशंका है।

कुछ बच्चों के परिजनों ने आग लगने के दौरान पानी के स्प्रे सिस्टम के काम नहीं करने का दावा किया है। हालांकि इस दावे की भी जांच की जानी है। उच्चस्तरीय जांच में अस्पताल की पूरी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की समीक्षा किए जाने की संभावना है।

मुख्यमंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वास्थ्य प्रशासन को घटना की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जांच के जरिए घटना की जिम्मेदारी तय की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सरकार की ओर से मृत बच्चों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने के साथ प्रभावित बच्चों के उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस कदम का उद्देश्य हादसे से प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देना है।

अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

अमरावती की घटना ने एक बार फिर अस्पतालों में आग से सुरक्षा और विशेष रूप से NICU जैसे संवेदनशील विभागों की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। NICU में ऐसे नवजात भर्ती होते हैं जो बेहद नाजुक स्थिति में होते हैं और जिन्हें लगातार चिकित्सा उपकरणों की सहायता की आवश्यकता होती है। किसी आपात स्थिति में इन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाना सामान्य मरीजों की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण होता है।

इसलिए अस्पतालों में अग्निशमन उपकरण, अलार्म, स्प्रिंकलर, आपातकालीन निकासी मार्ग और चिकित्सा उपकरणों की नियमित जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है। अमरावती हादसे की जांच में इन सभी पहलुओं की समीक्षा होने की उम्मीद है।

फिलहाल तीन नवजातों की मौत से अस्पताल और उनके परिवारों में शोक का माहौल है। सरकार ने जांच के आदेश देकर दोष तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि आग की वास्तविक वजह क्या थी, सुरक्षा व्यवस्था ने किस तरह काम किया और क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई। इस हादसे ने स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन की जरूरत को एक बार फिर सामने ला दिया है।

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