मुंबई में 22.40 करोड़ की कुर्क संपत्ति वापस: विशेष पीएमएलए कोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश
Mumbai मुंबई। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत मुंबई की विशेष अदालत ने एक अहम आदेश जारी करते हुए 22.40 करोड़ रुपये मूल्य की कुर्क की गई अचल संपत्तियों को वास्तविक वैध दावेदारों को वापस करने की अनुमति दे दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 23 जुलाई 2026 को आदेश जारी कर ईडी द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों की बहाली का निर्देश दिया। यह मामला विनोद कुमार चतुर्वेदी, मनोज पाठक और अन्य के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय ने पीएमएलए के तहत जांच शुरू की थी। जांच एजेंसी को आरोपियों पर अपराध से अर्जित धन को छिपाने और उसे वैध बनाने में शामिल होने का संदेह था।
ईडी की जांच में सामने आया कि मेसर्स अशर एग्रो लिमिटेड, जिसका स्वामित्व और नियंत्रण विनोद कुमार चतुर्वेदी और मनोज पाठक के पास था, ने कथित रूप से बैंकों के एक समूह के साथ करीब 916 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। जांच के अनुसार, कंपनी के प्रमोटरों ने शेल कंपनियों के नेटवर्क का इस्तेमाल कर ऋण राशि को अलग-अलग जगहों पर ट्रांसफर किया और फंड को डायवर्ट किया। ईडी ने जांच के दौरान साल 2021 में 22.40 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। बाद में पीएमएलए के तहत न्याय निर्णायक प्राधिकरण ने इस कुर्की की पुष्टि भी कर दी थी। इस मामले में ईडी ने मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल कर इन संपत्तियों को अपराध से अर्जित आय मानते हुए जब्त करने की मांग की थी।
इसके बाद मामले में कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) की कार्रवाई शुरू हुई। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी), मुंबई ने मेसर्स अशर इको पावर लिमिटेड के खिलाफ यह प्रक्रिया शुरू की थी। समाधान प्रक्रिया सफल नहीं होने के बाद कंपनी के खिलाफ परिसमापन यानी लिक्विडेशन की कार्यवाही शुरू की गई। लिक्विडेटर ने कुर्क की गई संपत्तियों की बहाली के लिए मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत में आवेदन दायर किया। पीएमएलए कानून के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ईडी ने अदालत के सामने इन संपत्तियों को मुक्त करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
ईडी ने अदालत को बताया कि पीएमएलए का उद्देश्य अपराध से प्राप्त आय को वास्तविक और वैध दावेदारों तक वापस पहुंचाना भी है। एजेंसी की सहमति और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कुर्क की गई अचल संपत्तियों को वास्तविक वैध दावेदारों को लौटाने का आदेश दिया। ईडी के अनुसार, यह फैसला वित्तीय अपराधों से प्रभावित पक्षों को राहत पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। एजेंसी ने कहा कि पीएमएलए के तहत कार्रवाई का उद्देश्य केवल संपत्तियों को जब्त करना नहीं बल्कि कानून के अनुसार वास्तविक हितधारकों के अधिकारों की रक्षा करना भी है।