मुंबई : 26/11 आतंकी हमले मामले में भारत ने एक बार फिर बड़ा कानूनी कदम उठाया है। मुंबई पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद, जकी-उर-रहमान लखवी समेत छह पाकिस्तानी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। इन आरोपियों को भगोड़ा घोषित करने और उनकी गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इसके लिए इंटरपोल के जरिए भी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी की जा रही है।
26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। आतंकियों ने मुंबई के कई प्रमुख स्थानों को निशाना बनाया था, जिसमें ताज होटल, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, नरीमन हाउस और अन्य स्थान शामिल थे। इस हमले में शामिल 10 आतंकियों में से अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा गया था, जबकि बाकी आतंकी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए थे।
छह आरोपियों पर शिकंजा
मुंबई पुलिस जिन छह आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, उनमें हाफिज सईद, जकी-उर-रहमान लखवी, साजिद मीर, अबू अलकमा, आसिम उर्फ अबू कहाफा और मेजर अब्दुर रहमान पाशा शामिल हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन लोगों ने 26/11 हमले की साजिश रचने, आतंकियों को प्रशिक्षण देने और हमले के दौरान उन्हें निर्देश देने में भूमिका निभाई थी।
विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने अदालत में बताया कि फरार आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क किया गया है। इंटरपोल के माध्यम से प्रोक्लेमेशन ऑर्डर की प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इन आरोपियों तक कानूनी कार्रवाई की जानकारी पहुंचाई जा सके।
गैरहाजिरी में चलेगा मुकदमा
नए कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 356 के तहत भगोड़े आरोपियों के खिलाफ उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने का प्रावधान है। इसी प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए इन आरोपियों के खिलाफ ट्रायल शुरू करने की तैयारी की जा रही है। यह बड़े आतंकी मामले में इस तरह की कानूनी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
कानून के तहत अदालत आरोपियों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने के बाद उपलब्ध सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकती है। पुलिस और अभियोजन पक्ष का कहना है कि इस मामले में पर्याप्त सबूत मौजूद हैं और लंबे समय से फरार आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में लाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
26/11 हमले की साजिश का आरोप
जांच एजेंसियों के मुताबिक, हाफिज सईद और अन्य आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क के जरिए मुंबई हमले की योजना तैयार की। एजेंसियों ने अदालत में पहले भी कई सबूत पेश किए हैं, जिनमें अजमल कसाब का बयान और सरकारी गवाह बने डेविड कोलमैन हेडली की जानकारी शामिल है।
अमेरिकी आतंकी डेविड हेडली ने जांच एजेंसियों को मुंबई हमले से जुड़े कई अहम तथ्य बताए थे। उसके बयानों के आधार पर जांच एजेंसियों ने हमले की साजिश में शामिल लोगों की भूमिका को लेकर कई दावे किए थे।
पाकिस्तान में मौजूद होने का दावा
भारत का आरोप है कि ये सभी आरोपी पाकिस्तान में मौजूद हैं और लंबे समय से भारतीय कानून की पकड़ से बाहर हैं। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाता रहा है।
इंटरपोल की मदद से इन आरोपियों तक पहुंचने और अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि इन आरोपियों की गिरफ्तारी और भारत लाने की प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संबंधित देशों की कार्रवाई पर भी निर्भर करेगी।
पीड़ितों को न्याय दिलाने की कोशिश
26/11 हमले के पीड़ित परिवार लंबे समय से इस मामले में सभी साजिशकर्ताओं पर कार्रवाई की मांग करते रहे हैं। भारत सरकार और जांच एजेंसियों का कहना है कि हमले के पीछे मौजूद हर व्यक्ति को कानून के दायरे में लाने का प्रयास जारी है।
मुंबई पुलिस की यह कार्रवाई केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि 26/11 हमले के दोषियों के खिलाफ लंबे समय से चल रही न्यायिक लड़ाई का अगला कदम मानी जा रही है। अब सभी की नजरें अदालत की आगे की कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रक्रिया पर टिकी हैं।
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