Nasik नासिक: छठ महापर्व की पावन बेला पर सोमवार को नासिक के गोदावरी तट पर श्रद्धा और आस्था का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। पर्व के तीसरे दिन यानी “संध्या अर्घ्य” के अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने एकत्र होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। पूरा तट “छठ मइया” के जयघोषों, लोकगीतों और परंपरागत भक्ति संगीत से गूंज उठा। भोर से ही श्रद्धालुओं की भीड़ गोदावरी तट के विभिन्न घाटों — रामकुंड, गोदाघाट और सोमेश्वर घाट पर जुटने लगी थी। पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे व्रती महिलाएं “दउरा” में ठेकुआ, फल, ईख, केला, नारियल और सुपारी लेकर घाटों की ओर रवाना हुईं। शाम होते-होते पूरा गोदावरी किनारा दीपों की रोशनी और भक्ति के रंगों में रंग गया।
सूर्यास्त के समय जब व्रती महिलाओं ने नदी में खड़े होकर अस्त होते सूर्य को जल और दूध से अर्घ्य अर्पित किया, तो वह दृश्य अत्यंत मनमोहक और भावनात्मक था। श्रद्धालुओं ने परिवार और समाज की सुख-समृद्धि के लिए “छठ मइया” से आशीर्वाद मांगा। कई जगहों पर छठ व्रतियों के परिजनों ने पारंपरिक गीत गाकर पर्व का उल्लास और भी बढ़ा दिया। स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक इंतज़ाम किए थे। नासिक नगर निगम, पुलिस और आपदा प्रबंधन दल की टीमें पूरे दिन घाटों पर मुस्तैद रहीं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नदी किनारे अस्थायी बैरिकेड लगाए गए, वहीं महिलाओं और बुजुर्गों के लिए विशेष सहायता केंद्र बनाए गए।
नगर निगम आयुक्त ने बताया कि छठ पर्व के दौरान सफाई व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। घाटों की सफाई और नदी की स्वच्छता को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सफाईकर्मी तैनात किए गए हैं। साथ ही, चिकित्सा दल और एम्बुलेंस की भी व्यवस्था रखी गई थी ताकि किसी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके। महाराष्ट्र जैसे राज्य में जहां उत्तर भारतीयों की बड़ी संख्या निवास करती है, छठ पर्व अब एक सांस्कृतिक उत्सव का रूले चुका है। नासिक, मुंबई, पुणे और ठाणे जैसे शहरों में यह पर्व उत्तर भारतीयों के साथ-साथ स्थानीय लोगों के बीच भी लोकप्रियता हासिल कर चुका है। नासिक में इस बार अनुमानतः 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने गोदावरी नदी के घाटों पर पूजा-अर्चना की।
छठ पर्व की विशेषता यह है कि इसमें सूर्य देव और छठ मइया की उपासना की जाती है, जो प्रकृति, जल, अग्नि और ऊर्जा के संतुलन का प्रतीक मानी जाती है। व्रती महिलाएं चार दिनों तक कठोर नियमों का पालन करती हैं—निराहार रहना, नदी में स्नान, स्वच्छता और संयम इस पर्व की मुख्य विशेषताएं हैं। मंगलवार की सुबह “उषा अर्घ्य” के साथ यह पर्व संपन्न होगा, जब श्रद्धालु उदयमान सूर्य को अर्घ्य देंगे। नासिक प्रशासन ने इस अवसर पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष ट्रैफिक और सुरक्षा योजना लागू की है।  छठ महापर्व का यह दृश्य न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय सांस्कृतिक विविधता और एकता का भी सुंदर उदाहरण पेश करता है। नासिक के घाटों पर उत्तर भारत की परंपरा, महाराष्ट्र की भूमि और भक्तों की भक्ति एक साथ मिलकर भारतीय आध्यात्मिकता की अनोखी झलक पेश कर रहे हैं।
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