टाटा कैपिटल की CSR पहल से 5.5 लाख लोगों को फायदा, CM फडणवीस ने की तारीफ
मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को टाटा कैपिटल की कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) पहलों की सराहना करते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में कंपनी की विभिन्न सामाजिक परियोजनाओं से राज्य के 5.5 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिला है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन पहलों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, कौशल विकास और सामाजिक सशक्तीकरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम किया गया है। उन्होंने बताया कि टाटा कैपिटल ने देशभर में अपने कुल सीएसआर खर्च का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा महाराष्ट्र में खर्च किया है। इसके अलावा कंपनी की सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी परियोजनाएं राष्ट्रीय स्तर पर 37 लाख से अधिक लोगों तक पहुंच चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी कंपनियों की ऐसी पहलें समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को सामाजिक विकास की दिशा में उपयोगी बताया।
टाटा कैपिटल की सीएसआर गतिविधियों को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि कंपनी ने पिछले पांच वर्षों में सामाजिक कल्याण के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
उनके अनुसार, महाराष्ट्र में 5.5 लाख से अधिक लोगों को इन परियोजनाओं से फायदा पहुंचा है। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के अलावा युवाओं को कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने जैसे कार्यों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कंपनी के कुल सीएसआर व्यय का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा महाराष्ट्र में लगाया गया। उन्होंने इसे राज्य के सामाजिक विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।
फडणवीस के अनुसार, टाटा कैपिटल की सामाजिक पहलें केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं हैं। देश के विभिन्न राज्यों में भी कंपनी की परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनसे 37 लाख से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई गई है।
हालांकि मुख्यमंत्री द्वारा बताए गए पांच वर्षों के कुल लाभार्थियों और महाराष्ट्र में व्यय के प्रतिशत की स्वतंत्र परियोजनावार पुष्टि उपलब्ध नहीं हो सकी है। ये आंकड़े उनके बयान के आधार पर प्रस्तुत किए जा रहे हैं।
टाटा कैपिटल वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में काम करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल है। कंपनी अपनी व्यावसायिक गतिविधियों के साथ सामाजिक विकास से संबंधित कार्यक्रम भी संचालित करती है।
कंपनी के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, उसकी सीएसआर नीति का उद्देश्य समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।
इसके लिए कंपनी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, जल सुरक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है।
टाटा कैपिटल की प्रमुख सीएसआर योजनाओं में 'पंख स्कॉलरशिप', 'आरोग्यतारा', 'जलआधार', 'द ग्रीन स्विच' और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी अन्य परियोजनाएं शामिल हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में कंपनी की 'पंख स्कॉलरशिप' योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को पढ़ाई जारी रखने में सहायता उपलब्ध कराना है।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है। योजना का उद्देश्य आर्थिक कठिनाइयों के कारण विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित होने की आशंका कम करना है।
कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023-24 के दौरान पंख स्कॉलरशिप कार्यक्रम के तहत 9,073 युवाओं को छात्रवृत्ति प्रदान की गई थी।
कंपनी का प्रयास है कि प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य बनाने के अवसर उपलब्ध हों।
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में टाटा कैपिटल की 'आरोग्यतारा' परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस कार्यक्रम के माध्यम से आंखों की जांच, उपचार और दृष्टि संबंधी समस्याओं के समाधान पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लोगों को आंखों के उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाते हैं।
कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, आरोग्यतारा कार्यक्रम महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में संचालित किया गया है। इसके माध्यम से लाखों लोगों की आंखों की जांच और उपचार से जुड़ी सेवाओं तक पहुंच बनाई गई है।
कंपनी ने बताया है कि इस परियोजना के अंतर्गत 4,300 से अधिक नेत्र जांच शिविर आयोजित किए गए हैं और 1.56 लाख से अधिक लाभार्थियों को दृष्टि बहाल करने वाले उपचार उपलब्ध कराए गए हैं।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी पहलों को सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है।
ऐसे में निजी संस्थाओं की ओर से स्वास्थ्य शिविरों और उपचार संबंधी कार्यक्रमों का आयोजन जरूरतमंद परिवारों को सहायता प्रदान कर सकता है।
इसके अलावा कौशल विकास के क्षेत्र में भी कंपनी की पहलों का उद्देश्य युवाओं को रोजगार से जुड़ी क्षमताएं विकसित करने में सहयोग देना है।
आज के समय में तकनीकी बदलाव और उद्योगों की बढ़ती जरूरतों के कारण कौशल प्रशिक्षण का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के युवाओं के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण बेहतर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने का माध्यम बन सकता है।
इसी तरह जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा भी टाटा कैपिटल की सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी योजनाओं का हिस्सा हैं।
कंपनी की 'जलआधार' परियोजना के माध्यम से जल संकट वाले क्षेत्रों में जल संचयन, भूजल स्तर सुधार और कृषि संबंधी गतिविधियों में सहायता देने का काम किया गया है।
कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में इस कार्यक्रम के तहत महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु और कर्नाटक के 110 से अधिक गांवों में गतिविधियां संचालित की गईं।
इन परियोजनाओं से तीन लाख से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई गई। कार्यक्रम का उद्देश्य जल उपलब्धता बेहतर बनाने के साथ कृषि और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करना है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कंपनी की सीएसआर गतिविधियों का उल्लेख करते हुए निजी क्षेत्र की सामाजिक जिम्मेदारी पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि कंपनियों द्वारा समाज के कमजोर वर्गों के लिए किए जाने वाले कार्य राज्य के समग्र विकास में योगदान दे सकते हैं।
भारत में कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी को कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 के अंतर्गत कानूनी व्यवस्था से जोड़ा गया है।
इसके तहत निर्धारित वित्तीय मानदंडों को पूरा करने वाली कंपनियों को सामाजिक जिम्मेदारी से संबंधित गतिविधियों पर नियमानुसार खर्च करना होता है।
शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्र सीएसआर गतिविधियों की प्रमुख श्रेणियों में शामिल हैं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य व्यावसायिक संस्थाओं की सामाजिक विकास में भागीदारी बढ़ाना है।
महाराष्ट्र औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों के मामले में देश के प्रमुख राज्यों में शामिल है। राज्य में बड़ी संख्या में कंपनियां और वित्तीय संस्थान कार्यरत हैं।
ऐसे में सीएसआर के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आजीविका से जुड़ी परियोजनाओं को सहयोग देने की संभावनाएं मौजूद हैं।
राज्य सरकार भी सीएसआर गतिविधियों के बेहतर समन्वय और निगरानी की दिशा में प्रयास कर रही है। अगस्त 2026 में मुख्यमंत्री फडणवीस ने अधिकारियों को सीएसआर परियोजनाओं के समन्वय के लिए विशेष व्यवस्था तैयार करने के निर्देश दिए थे।
इस पहल का उद्देश्य सामाजिक परियोजनाओं में संसाधनों के प्रभावी उपयोग और जरूरतमंद क्षेत्रों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाना बताया गया था।
टाटा कैपिटल की सीएसआर पहलों के संबंध में कंपनी की वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में भी सामाजिक कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, उस वित्त वर्ष में कंपनी की प्रमुख सीएसआर गतिविधियों से देशभर में लगभग 10.96 लाख लाभार्थियों तक पहुंच बनाई गई थी।
इन गतिविधियों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा, जल संरक्षण और पर्यावरण संबंधी कार्यक्रम प्रमुख रहे।
फिलहाल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में महाराष्ट्र के 5.5 लाख से अधिक लोगों को टाटा कैपिटल की सीएसआर पहलों का लाभ मिला है।
कंपनी के राष्ट्रीय स्तर पर 37 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचने के आंकड़े को उन्होंने सामाजिक जिम्मेदारी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
इन पहलों से यह संदेश सामने आता है कि निजी कंपनियां अपने संसाधनों और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका जैसे क्षेत्रों में सहयोग दे सकती हैं।
हालांकि किसी भी सामाजिक परियोजना की वास्तविक सफलता का आकलन केवल लाभार्थियों की संख्या से नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आए स्थायी सुधार, सुविधाओं की गुणवत्ता और कार्यक्रमों के दीर्घकालिक प्रभाव के आधार पर भी किया जाना आवश्यक है।