मुंबई में 15 हजार हिंदी भाषी ऑटो चालकों को मिला मराठी प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र
मुंबई। उत्तर भारत से आए करीब 15 हजार हिंदी भाषी ऑटो-रिक्शा चालकों ने मराठी भाषा का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद बुधवार को बोरीवली में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्हें प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इस पहल का उद्देश्य ऑटो चालकों को मराठी भाषा से जोड़ना और यात्रियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने में सक्षम बनाना है।
कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने प्रशिक्षण पूरा करने वाले ऑटो चालकों को प्रमाणपत्र वितरित किए। इस अवसर पर राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ऑटो चालक और स्थानीय लोग शामिल हुए।
यह मराठी भाषा प्रशिक्षण पहल स्थानीय विधायक प्रकाश सर्वे की ओर से शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य मुंबई में काम करने वाले उन ऑटो चालकों को मराठी भाषा की बुनियादी जानकारी देना था, जो दूसरे राज्यों से आकर यहां लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
मुंबई जैसे महानगर में अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के लोग रहते हैं। ऐसे में यात्रियों के साथ बेहतर तालमेल बनाने के लिए स्थानीय भाषा का ज्ञान काफी मददगार साबित होता है। इसी सोच के साथ ऑटो चालकों को मराठी बोलने, समझने और रोजमर्रा की बातचीत में इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान चालकों को यात्रियों से बातचीत करने, रास्तों और स्थानों की जानकारी देने, सामान्य शब्दों और वाक्यों का उपयोग करने सहित मराठी भाषा की मूल बातें सिखाई गईं। इससे उन्हें काम के दौरान यात्रियों के साथ संवाद करने में आसानी होगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि भाषा लोगों को जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को स्थानीय भाषा और संस्कृति का सम्मान करना चाहिए। मराठी सीखने की पहल सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने में मदद करेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई सभी लोगों को अवसर देने वाला शहर है। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग आकर काम करते हैं और शहर के विकास में योगदान देते हैं। स्थानीय भाषा सीखने से आपसी समझ और सहयोग बढ़ता है।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऑटो चालक शहर की परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। रोजाना हजारों यात्रियों से उनका संपर्क होता है, इसलिए भाषा का ज्ञान उनके काम को और बेहतर बना सकता है।
ऑटो चालकों ने भी इस पहल को लेकर खुशी जाहिर की। उनका कहना है कि मराठी भाषा सीखने से उन्हें स्थानीय लोगों और यात्रियों से बातचीत करने में सुविधा होगी। कई चालकों ने बताया कि पहले भाषा को लेकर परेशानी आती थी, लेकिन प्रशिक्षण के बाद आत्मविश्वास बढ़ा है।
मुंबई में बड़ी संख्या में उत्तर भारत के लोग रोजगार के लिए रहते हैं। ऑटो-रिक्शा क्षेत्र में भी ऐसे कई चालक हैं, जो वर्षों से शहर में सेवाएं दे रहे हैं। इस प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें स्थानीय समाज से और बेहतर तरीके से जुड़ने का अवसर मिला है।
आयोजकों के अनुसार, यह पहल केवल भाषा सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना भी है। स्थानीय भाषा का सम्मान करने से विभिन्न समुदायों के बीच संबंध और मजबूत होते हैं।
महाराष्ट्र में भाषा को लेकर समय-समय पर राजनीतिक और सामाजिक बहस होती रही है। ऐसे में हिंदी भाषी लोगों को मराठी भाषा का प्रशिक्षण देने की यह पहल सकारात्मक संदेश के रूप में देखी जा रही है।
फिलहाल 15 हजार ऑटो चालकों को प्रमाणपत्र दिए जा चुके हैं। आयोजकों का कहना है कि भविष्य में इस तरह के और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग मराठी भाषा से जुड़ सकें और महाराष्ट्र की संस्कृति को समझ सकें।