शिवपुरी : मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से पति-पत्नी के बीच करवा चौथ के व्रत को लेकर एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति अपनी पत्नी के खिलाफ शिकायत लेकर पुलिस थाने पहुंच गया। पति का आरोप है कि उसकी पत्नी ने करवा चौथ पर उसकी लंबी उम्र के लिए न तो व्रत रखा और न ही चंद्रमा की पूजा की। इससे नाराज पति ने पत्नी पर बेवफाई का आरोप लगाते हुए अपनी जान को खतरा होने की आशंका भी जताई है। मामला बदरवास थाना क्षेत्र के बिजरावन गांव का है। यहां रहने वाले करीब 30 वर्षीय बारेलाल आदिवासी ने थाना प्रभारी को लिखित आवेदन देकर पत्नी मिथलेश आदिवासी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इतना ही नहीं, पति ने शिकायत में कहा है कि यदि पत्नी उसके लिए करवा चौथ की पूजा नहीं करेगी तो वह उसे तलाक दे देगा। इस अनोखी शिकायत के बाद पुलिस भी असमंजस में पड़ गई। हालांकि पुलिस ने फिलहाल एफआईआर दर्ज नहीं की है और दोनों पक्षों के बीच बातचीत कर विवाद सुलझाने की तैयारी की जा रही है।

जानकारी के अनुसार, शिवपुरी जिले के बदरवास थाना अंतर्गत बिजरावन गांव निवासी बारेलाल आदिवासी ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को करवा चौथ के अवसर पर पुलिस थाने में अपनी पत्नी के खिलाफ आवेदन दिया। शिकायतकर्ता ने अपना परिचय बारेलाल आदिवासी, पिता लालू आदिवासी, उम्र लगभग 30 वर्ष बताया है। उसने आवेदन में कहा कि पत्नी मिथलेश आदिवासी उसके लिए करवा चौथ का व्रत नहीं रख रही है और पारंपरिक पूजा करने से भी इनकार कर रही है।

पति का कहना है कि करवा चौथ का त्योहार पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए मनाया जाता है। इस अवसर पर महिलाएं व्रत रखती हैं और चंद्रमा की पूजा करके पति के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करती हैं। बारेलाल ने पत्नी द्वारा इन परंपराओं का पालन नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई।

उसने पुलिस को दिए आवेदन में पत्नी पर बेवफाई करने का भी आरोप लगाया। इसके साथ ही दावा किया कि पत्नी उसके प्रति अच्छा व्यवहार नहीं कर रही है और उसे नुकसान पहुंचा सकती है। हालांकि पति की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

बारेलाल का कहना है कि उसने पत्नी से करवा चौथ का व्रत रखने और चंद्रमा की पूजा करने के लिए कहा था, लेकिन पत्नी ने उसकी बात नहीं मानी। इसके बाद उसने इस मामले में पुलिस से शिकायत करने का फैसला किया।

शिकायत में बारेलाल ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यदि पत्नी व्रत नहीं रखना चाहती तो कम से कम चंद्रमा की पूजा करके उसकी लंबी उम्र की कामना कर सकती है। उसका आरोप है कि पत्नी ने ऐसा करने से भी इनकार कर दिया। इसी बात को उसने अपनी सुरक्षा से जोड़ते हुए पुलिस के सामने चिंता जताई।

पति ने आवेदन में तलाक देने की बात भी लिखी। उसने कहा कि यदि पत्नी इस बार उसके लिए पूजा नहीं करेगी तो वह वैवाहिक संबंध समाप्त करने का निर्णय ले सकता है। हालांकि केवल पुलिस को आवेदन देने या तलाक की चेतावनी देने से विवाह कानूनी रूप से समाप्त नहीं होता। इसके लिए लागू वैवाहिक कानून और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।

बारेलाल की शिकायत सामने आने के बाद मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। करवा चौथ के दिन जहां कई परिवार पारंपरिक तरीके से पूजा और व्रत की तैयारियों में व्यस्त थे, वहीं बदरवास थाने में पहुंचा यह आवेदन लोगों का ध्यान आकर्षित करने लगा।

शिकायत पत्र की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगी। लोगों ने इस मामले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने इसे पति-पत्नी के बीच आपसी विश्वास की कमी से जोड़कर देखा, जबकि अन्य ने धार्मिक परंपराओं को लेकर व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पारिवारिक अपेक्षाओं पर चर्चा की।

मामले में पुलिस ने भी स्थिति को समझने का प्रयास किया। अधिकारियों के सामने सवाल था कि केवल करवा चौथ का व्रत नहीं रखने या चंद्रमा की पूजा नहीं करने को लेकर किस प्रकार की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

पुलिस ने शिकायत को पारिवारिक विवाद के रूप में देखते हुए दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने का निर्णय लिया है। कोलारस के अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीओपी) संजय मिश्रा ने बताया कि बदरवास क्षेत्र के बारेलाल आदिवासी ने पत्नी के व्रत नहीं रखने को लेकर आवेदन दिया है।

उन्होंने कहा कि इस मामले में महिला पुलिस अधिकारी के माध्यम से पति-पत्नी के बीच बातचीत कराई जाएगी। पुलिस का प्रयास रहेगा कि दोनों पक्ष अपनी बात रख सकें और आपसी मनमुटाव दूर करने का रास्ता निकाला जा सके।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायत में लगाए गए आरोपों और वास्तविक परिस्थितियों को समझना आवश्यक है। पति की नाराजगी केवल धार्मिक व्रत नहीं रखने को लेकर है या दोनों के बीच पहले से अन्य पारिवारिक विवाद भी चल रहे हैं, यह बातचीत के बाद स्पष्ट हो सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम में पत्नी मिथलेश आदिवासी का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। उन्होंने व्रत नहीं रखने का निर्णय क्यों लिया और पति द्वारा लगाए गए आरोपों पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है, इसकी स्वतंत्र जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए पत्नी पर लगाए गए बेवफाई या नुकसान पहुंचाने संबंधी आरोपों को प्रमाणित नहीं माना जा सकता।

करवा चौथ का पर्व पारंपरिक रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा पति की लंबी उम्र की कामना के लिए मनाया जाता है। इस अवसर पर कई महिलाएं दिनभर उपवास रखती हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन तथा पूजा के बाद व्रत खोलती हैं। हालांकि व्रत रखना धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत निर्णय का विषय है। किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध उपवास या धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

विशेषज्ञों के अनुसार, पति-पत्नी के संबंधों में आपसी सम्मान, भरोसा और संवाद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि किसी धार्मिक परंपरा या पारिवारिक अपेक्षा को लेकर मतभेद हो तो बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया जाना चाहिए।

इस मामले में भी पुलिस ने तत्काल दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय दोनों पक्षों की काउंसलिंग कराने का रास्ता चुना है। महिला अधिकारी की मौजूदगी में बातचीत होने से दोनों पक्षों को अपनी शिकायतें और परेशानियां रखने का अवसर मिल सकता है।

शिवपुरी के इस घटनाक्रम ने धार्मिक परंपराओं और वैवाहिक संबंधों से जुड़ी अपेक्षाओं पर नई चर्चा शुरू कर दी है। पति का मानना है कि पत्नी के व्रत नहीं रखने से उसके प्रति समर्पण पर सवाल उठता है, जबकि कानूनी और व्यक्तिगत दृष्टि से किसी धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेना व्यक्ति की स्वेच्छा पर निर्भर करता है।

फिलहाल बदरवास पुलिस इस मामले को सुलझाने के लिए प्रयास कर रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पति के आवेदन पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। महिला पुलिस अधिकारी के माध्यम से दोनों की काउंसलिंग कराई जानी है।

अब देखना होगा कि पुलिस की पहल के बाद पति-पत्नी के बीच विवाद सुलझ पाता है या मामला आगे किसी कानूनी प्रक्रिया तक पहुंचता है। फिलहाल करवा चौथ का व्रत नहीं रखने पर पत्नी के खिलाफ थाने पहुंचने का यह मामला शिवपुरी ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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