भोपाल। राजधानी भोपाल में साइबर ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। टीटी नगर इलाके में रहने वाले 50 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड के साथ कथित तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित आवाज की नकल कर करीब 35 हजार रुपये की धोखाधड़ी की गई। आरोपी ने पीड़ित के दोस्त जैसी आवाज में फोन कर खुद को उसका परिचित बताया और अचानक पैसों की जरूरत होने की बात कही। इसके बाद उसे QR कोड भेजकर रकम ट्रांसफर करने के लिए राजी कर लिया।

मामले में टीटी नगर पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि फोन करने वाला व्यक्ति कौन था और क्या उसने वास्तव में किसी तकनीक के जरिए पीड़ित के परिचित की आवाज की नकल की थी। फिलहाल मामले को AI आधारित साइबर ठगी के संदिग्ध मामले के तौर पर देखा जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, बंगंगा इलाके में रहने वाले सिक्योरिटी गार्ड निकेत मालवीय को 30 सितंबर को एक अनजान नंबर से फोन आया था। फोन करने वाले की आवाज उन्हें अपने दोस्त जैसी लगी। कॉल करने वाले ने बातचीत के दौरान ऐसा व्यवहार किया, जिससे निकेत को लगा कि फोन उनके परिचित ने ही किया है।

कथित ठग ने निकेत से कहा कि उसे तत्काल पैसों की जरूरत है। उसने पहले 15 हजार रुपये की मांग की और रकम भेजने के लिए एक QR कोड भी भेज दिया। आवाज परिचित लगने के कारण निकेत को शुरुआत में फोन पर संदेह नहीं हुआ। आरोपी ने बातचीत के जरिए उनका भरोसा हासिल किया और पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा।

QR कोड मिलने के बाद निकेत ने बताए गए तरीके से रकम भेज दी। इसके बाद भी आरोपी की ओर से पैसों की मांग किए जाने की बात सामने आई। इस पूरे घटनाक्रम में पीड़ित से अलग-अलग तरीके से रकम ट्रांसफर कराई गई और कुल नुकसान करीब 35 हजार रुपये बताया जा रहा है।

घटना के बाद जब निकेत को संदेह हुआ और उन्होंने अपने वास्तविक दोस्त से संपर्क किया तो उन्हें पता चला कि दोस्त ने उनसे पैसे नहीं मांगे थे। इसके बाद उन्हें समझ आया कि फोन करने वाला व्यक्ति उनका दोस्त नहीं था। आवाज की समानता के कारण वह ठगी का शिकार हो गए।

इसके बाद पीड़ित ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। शिकायत मिलने पर टीटी नगर पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी धाराओं के तहत जांच शुरू कर दी। पुलिस अब उस मोबाइल नंबर, कॉल और रकम ट्रांसफर करने के लिए भेजे गए QR कोड से संबंधित जानकारी जुटा रही है।

इस मामले में AI तकनीक के संभावित इस्तेमाल ने साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आमतौर पर साइबर अपराधी फोन करके खुद को रिश्तेदार, दोस्त या परिचित बताकर पैसे मांगते हैं। लेकिन तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ अब किसी व्यक्ति की आवाज जैसी आवाज तैयार करने की संभावना ने इस तरह के अपराधों को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

पीड़ित को सबसे ज्यादा भरोसा इसलिए हुआ क्योंकि फोन करने वाले की आवाज उसके दोस्त से मिलती-जुलती थी। सामान्य स्थिति में कोई व्यक्ति परिचित की आवाज सुनकर उसकी पहचान पर भरोसा कर सकता है। साइबर अपराधी इसी भरोसे का फायदा उठाकर जल्दबाजी में भुगतान कराने की कोशिश करते हैं।

इस घटना में भी कथित आरोपी ने पैसों की तत्काल जरूरत बताकर पीड़ित पर दबाव बनाया। इसके बाद QR कोड भेजा गया। QR कोड के जरिए भुगतान करना आसान होने के कारण कई लोग बिना पूरी जानकारी जांचे रकम ट्रांसफर कर देते हैं। साइबर अपराधी इसी सुविधा का फायदा उठा सकते हैं।

पुलिस जांच में अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि आरोपी ने पीड़ित के दोस्त की आवाज से मिलती-जुलती आवाज कैसे हासिल की। क्या आरोपी के पास पहले से पीड़ित और उसके दोस्त की जानकारी थी या किसी अन्य माध्यम से यह जानकारी जुटाई गई, इसका पता जांच के बाद चलेगा।

साइबर ठगी के मामलों में अपराधी अक्सर पीड़ित के बारे में पहले से उपलब्ध जानकारी का इस्तेमाल करते हैं। सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी, फोटो, रिश्तों और परिचितों से जुड़ी जानकारी का दुरुपयोग भी किया जा सकता है। इस मामले में भी पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि आरोपी को पीड़ित के दोस्त के बारे में जानकारी कहां से मिली।

35 हजार रुपये की ठगी के बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की। अब पुलिस बैंकिंग लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और भुगतान की जानकारी जुटाकर रकम की आगे की गतिविधियों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। QR कोड के जरिए जिस खाते या डिजिटल माध्यम में रकम पहुंची, उसकी जानकारी जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है।

पुलिस की जांच का एक अहम हिस्सा मोबाइल फोन और कॉल से जुड़े तकनीकी साक्ष्य भी होंगे। जिस नंबर से फोन आया था, उसकी पहचान, कॉल का समय और अन्य तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपी तक पहुंचने का प्रयास किया जा सकता है।

यह मामला लोगों के लिए भी चेतावनी है कि केवल आवाज पहचानकर किसी व्यक्ति पर पूरी तरह भरोसा करना सुरक्षित नहीं है। अगर कोई परिचित अचानक फोन करके पैसे मांगता है तो रकम भेजने से पहले उसके वास्तविक नंबर पर संपर्क कर पुष्टि करनी चाहिए। खासकर तब, जब सामने वाला QR कोड भेजकर तत्काल भुगतान करने का दबाव बनाए।

साइबर विशेषज्ञ लगातार सलाह देते हैं कि अनजान व्यक्ति की ओर से भेजे गए QR कोड को स्कैन करने से पहले पूरी जानकारी जांचनी चाहिए। किसी भी संदिग्ध भुगतान के मामले में जल्दबाजी से बचना जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति फोन पर भावनात्मक दबाव बनाकर तत्काल पैसे भेजने के लिए कहता है तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना बेहतर है।

QR कोड को लेकर भी लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। किसी को पैसा प्राप्त करने के लिए आम तौर पर QR कोड स्कैन करने की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति भुगतान पाने के नाम पर QR कोड स्कैन करने या कोई संदिग्ध प्रक्रिया अपनाने को कहता है तो पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है।

भोपाल में सामने आया यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें कथित तौर पर परिचित की आवाज की नकल का इस्तेमाल कर भरोसा जीतने की कोशिश की गई। यदि जांच में AI या किसी अन्य तकनीक के इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो यह साइबर अपराध के बदलते तरीकों का एक और उदाहरण होगा।

फिलहाल टीटी नगर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है। पुलिस आरोपी की पहचान करने के साथ-साथ ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, QR कोड और बैंकिंग लेनदेन की जानकारी जुटा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि घटना में अकेला आरोपी शामिल था या इसके पीछे कोई बड़ा साइबर नेटवर्क काम कर रहा था।

कुल मिलाकर भोपाल में 50 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड से करीब 35 हजार रुपये की ठगी का यह मामला साइबर अपराध के बदलते तरीकों की ओर इशारा करता है। कथित तौर पर आरोपी ने दोस्त जैसी आवाज में बात कर भरोसा जीता, तत्काल पैसों की जरूरत बताई और QR कोड के जरिए रकम ट्रांसफर करा ली। पुलिस अब पूरे मामले की तकनीकी जांच कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि आवाज की नकल कैसे की गई और ठगी के पीछे कौन लोग शामिल हैं।

Tags: