अशोकनगर : रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जेल प्रशासन ने कैदियों और उनके परिजनों के बीच भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्था की। शुक्रवार को जेल में बंद कैदियों की बहनों को अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने का अवसर दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं जेल पहुंचीं और अपने भाइयों को राखी बांधकर उनके माथे पर तिलक लगाया।
जेल परिसर में भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की भावनाएं देखने को मिलीं। कई महिलाएं अपने भाइयों से मिलकर भावुक हो गईं। लंबे समय बाद मिले भाई-बहनों के बीच बातचीत का माहौल भावनात्मक रहा। बहनों ने भाइयों की लंबी उम्र और अच्छे भविष्य की कामना की, वहीं कैदियों ने भी अपनी बहनों से मिलकर खुशी जाहिर की।
जेल प्रशासन ने की खास तैयारियां
जेल प्रशासन की ओर से रक्षाबंधन को लेकर पहले से ही विशेष इंतजाम किए गए थे। जेल अधीक्षक ललित दीक्षित ने बताया कि प्रशासन ने कैदियों को उनकी बहनों और परिवार के सदस्यों से सीधे मिलने की अनुमति दी थी, ताकि वे इस खास दिन पर अपने रिश्ते को महसूस कर सकें।
उन्होंने बताया कि मुलाकात के लिए निर्धारित समय सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रखा गया था। इसके बाद दोपहर 2 बजे से फिर मुलाकात की व्यवस्था की गई। इस दौरान सभी जरूरी सुरक्षा व्यवस्था का भी ध्यान रखा गया।
हर कैदी को मिला 10 मिनट का समय
जेल प्रशासन ने व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रत्येक कैदी को अपनी बहन से राखी बंधवाने और मिठाई खाने के लिए 10 मिनट का समय दिया। इस अवधि में कैदियों ने अपनी बहनों से बातचीत की और रक्षाबंधन का त्योहार मनाया।
जेल अधिकारियों ने बताया कि समय सीमा तय करने का उद्देश्य सभी कैदियों को अपने परिवार से मिलने का मौका देना था। सीमित समय में भी भाई-बहनों के बीच भावनाओं का आदान-प्रदान देखने को मिला।
215 कैदियों में नौ महिलाएं शामिल
जेल प्रशासन के अनुसार, वर्तमान में कुल 215 कैदी जेल में बंद हैं, जिनमें नौ महिला कैदी भी शामिल हैं। रक्षाबंधन के मौके पर पुरुष और महिला कैदियों के लिए भी आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं।
अधिकारियों ने बताया कि त्योहार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मुलाकात प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया गया। जेल कर्मचारियों को भी विशेष निर्देश दिए गए थे।
भावुक कर देने वाले रहे पल
रक्षाबंधन के दौरान जेल परिसर में कई ऐसे दृश्य देखने को मिले, जहां भाई और बहन एक-दूसरे को देखकर भावुक हो गए। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और तिलक लगाकर उनके बेहतर जीवन की प्रार्थना की।
कई कैदियों ने कहा कि जेल में रहते हुए परिवार से दूरी महसूस होती है, लेकिन ऐसे अवसर उन्हें अपने रिश्तों से जुड़े रहने का मौका देते हैं। बहनों की मौजूदगी से उनके चेहरे पर खुशी दिखाई दी।
रिश्तों को मजबूत करने की पहल
जेल प्रशासन का कहना है कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य कैदियों को समाज और परिवार से जोड़कर रखना है। त्योहारों के अवसर पर परिवार से मुलाकात कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मक सोच के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
रक्षाबंधन जैसे पर्व भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने के साथ-साथ भावनात्मक समर्थन का माध्यम भी बनते हैं। जेल प्रशासन ने इसी भावना को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की।
सुरक्षा के साथ पूरी हुई मुलाकात प्रक्रिया
प्रशासन ने बताया कि पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया गया। जेल परिसर में आने वाले सभी परिजनों की जांच की गई और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही मुलाकात कराई गई।
जेल अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे अवसरों पर कैदियों और उनके परिवारों के बीच बेहतर संवाद के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते रहेंगे।
रक्षाबंधन के इस आयोजन ने जेल की दीवारों के बीच भी रिश्तों की गर्माहट और भावनाओं को जीवंत कर दिया। बहनों की राखी और शुभकामनाओं ने कैदियों के लिए इस त्योहार को यादगार बना दिया।