IPS नरेंद्र रावत पर सज्जन सिंह वर्मा की टिप्पणी, एसोसिएशन ने जताई कड़ी आपत्ति
DCP पर सज्जन वर्मा की टिप्पणी
भोपाल: मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा की इंदौर के पुलिस उपायुक्त (DCP) और आईपीएस अधिकारी नरेंद्र रावत को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया है। मध्य प्रदेश भारतीय पुलिस सेवा एसोसिएशन ने वर्मा के बयान पर आपत्ति जताते हुए उनकी टिप्पणियों को अशोभनीय, आपत्तिजनक और अपमानजनक बताया है। एसोसिएशन ने जनप्रतिनिधियों से लोक सेवकों के प्रति मर्यादित और संयमित व्यवहार बनाए रखने की अपील की है।
यह विवाद 19 सितंबर को इंदौर में आयोजित कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से जुड़ा है। कार्यक्रम के दौरान पंडाल में ज्यादा भीड़ होने के कारण व्यवस्था प्रभावित हुई थी। कार्यक्रम में मंच प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी डीसीपी नरेंद्र रावत के पास थी। एसोसिएशन के मुताबिक रावत पहले से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार भीड़ को व्यवस्थित करने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान मंच पर पुलिस अधिकारियों और कार्यक्रम से जुड़े लोगों के बीच कहासुनी की स्थिति बनी। इस घटनाक्रम के बाद सज्जन सिंह वर्मा ने मीडिया से बातचीत में नरेंद्र रावत को लेकर तीखी टिप्पणी की। रिपोर्टों के अनुसार वर्मा ने अधिकारी को लेकर ‘सिंघम’ वाला तंज किया और कहा कि सरकारें बदलती रहती हैं तथा कई अधिकारी आते-जाते रहे हैं।
मामला सामने आने के बाद मध्य प्रदेश IPS एसोसिएशन ने 21 सितंबर को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। एसोसिएशन ने कहा कि ड्यूटी पर तैनात अधिकारी अपनी शासकीय जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे थे। संघ ने वर्मा द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा की निंदा करते हुए सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों से सरकारी अधिकारियों के प्रति गरिमा और संयम बनाए रखने की अपेक्षा की।
एसोसिएशन की प्रतिक्रिया के बाद मामला प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर भी कार्यक्रम के दौरान हुए घटनाक्रम और इसके बाद दिए गए बयानों को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। हालांकि विवाद में दोनों घटनाओं को अलग-अलग संदर्भ में देखा जाना जरूरी है—पहला कार्यक्रम के दौरान भीड़ और सुरक्षा प्रबंधन से जुड़ा घटनाक्रम और दूसरा उसके बाद वर्मा द्वारा पुलिस अधिकारी को लेकर दिया गया बयान।
IPS एसोसिएशन ने अपने बयान में पुलिस अधिकारी की जिम्मेदारी और लोक सेवकों की गरिमा का मुद्दा उठाया है। वहीं वर्मा की टिप्पणियों को लेकर सामने आई रिपोर्टों में उनका पक्ष कार्यक्रम के दौरान पुलिस के व्यवहार की आलोचना के रूप में दर्ज है। फिलहाल इस मामले ने मध्य प्रदेश में राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों के बीच संवाद की मर्यादा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।