महू। बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। मध्य प्रदेश के महू की अदालत ने चेक बाउंस के एक कथित मामले में उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। यह मामला नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत दर्ज है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि अभिनेता को गिरफ्तार कर 13 अक्टूबर 2026 या उससे पहले अदालत के समक्ष पेश किया जाए।

इस मामले में एक तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है। उपलब्ध अदालती रिपोर्टों के मुताबिक यह आदेश उत्तर प्रदेश के मऊ की अदालत ने नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के महू की अदालत ने जारी किया है। मामला प्रकाश जाजू बनाम राजपाल यादव के नाम से दर्ज है और इसका केस नंबर SCNI/158/2026 बताया गया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी फरहान मसूद कुरैशी ने 22 सितंबर को यह आदेश जारी किया था।

अदालत के आदेश में मुंबई पुलिस को वारंट की तामील कराने और राजपाल यादव को महू की अदालत में पेश करने को कहा गया है। अगली सुनवाई 13 अक्टूबर तय की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक यदि यादव अदालत में पेश होते हैं तो उन्हें 500 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानती बॉन्ड पर छोड़े जाने का प्रावधान वारंट में दर्ज है।

यह मामला फिल्म फाइनेंसर प्रकाश जाजू की शिकायत से जुड़ा है। उनके अधिवक्ता की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक जाजू लंबे समय से फिल्म उद्योग में फाइनेंसिंग से जुड़े हैं और उनकी फर्म निर्मला जानकी सिनेमा के नाम से काम करती है। आरोप है कि उन्होंने राजपाल यादव को 25 लाख रुपये दिए थे और इस वित्तीय लेनदेन को लेकर दोनों पक्षों के बीच एक समझौता भी हुआ था।

शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि रकम लौटाने के लिए राजपाल यादव की ओर से पोस्ट-डेटेड चेक दिए गए थे। आरोप है कि समझौते के मुताबिक रकम वापस नहीं की गई और जब चेक बैंक में जमा किए गए तो वे बाउंस हो गए। इसके बाद प्रकाश जाजू ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत अदालत का रुख किया। ये शिकायतकर्ता पक्ष के आरोप हैं और इनका अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होगा।

नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 मुख्य रूप से उस स्थिति से संबंधित है, जब वैध देनदारी के भुगतान के लिए जारी किया गया चेक पर्याप्त राशि न होने या अन्य निर्धारित कारणों से बैंक द्वारा अस्वीकार कर दिया जाता है। ऐसे मामलों में कानूनी नोटिस और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद शिकायतकर्ता अदालत में मामला दाखिल कर सकता है।

राजपाल यादव के खिलाफ मौजूदा महू का मामला उनके दूसरे चेक बाउंस मामलों से अलग बताया जा रहा है। अभिनेता इससे पहले दिल्ली से जुड़े चेक बाउंस मामलों में भी कानूनी कार्यवाही का सामना कर चुके हैं। सितंबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली से जुड़े सात मामलों में उन्हें कुछ रकम जमा करने की शर्त पर अंतरिम राहत दी थी।

दिल्ली से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर को राजपाल यादव को पांच करोड़ रुपये जमा करने की शर्त पर सरेंडर से अंतरिम छूट दी थी। बाद में 15 सितंबर को अदालत ने उन्हें दो करोड़ रुपये जमा करने के लिए अतिरिक्त समय देते हुए इसे अंतिम अवसर बताया था। यह मामला महू के प्रकाश जाजू वाले मामले से अलग वित्तीय विवाद से संबंधित है।

महू वाले मामले में फिलहाल अदालत ने जमानती वारंट जारी किया है। जमानती वारंट का अर्थ यह है कि आरोपी को अदालत के सामने उपस्थित कराने की प्रक्रिया शुरू की जाती है, लेकिन निर्धारित शर्तें पूरी करने पर उसे जमानत मिल सकती है। इसे दोष सिद्ध होने के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

अदालत ने अगली तारीख 13 अक्टूबर तय की है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि राजपाल यादव तय तारीख से पहले या उसी दिन अदालत के सामने उपस्थित होते हैं या नहीं। उनकी उपस्थिति के बाद अदालत शिकायत, दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय करेगी।

प्रकाश जाजू की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक वित्तीय लेनदेन के बाद दिए गए चेक के अनादर के चलते मामला अदालत तक पहुंचा। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि निर्धारित समय में रकम वापस नहीं मिलने के कारण कानूनी कार्रवाई करनी पड़ी। दूसरी ओर इस विशेष मामले पर राजपाल यादव की विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आई है।

राजपाल यादव हिंदी फिल्मों के चर्चित अभिनेता हैं और लंबे समय से फिल्म उद्योग में सक्रिय हैं। कॉमेडी और चरित्र भूमिकाओं के जरिए उन्होंने अलग पहचान बनाई है। हालांकि हाल के वर्षों में उनके नाम से जुड़े कई वित्तीय विवाद और चेक बाउंस मामले अदालतों तक पहुंचे हैं।

मौजूदा मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अदालत ने केवल राजपाल यादव की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी किया है। आगे की सुनवाई में शिकायतकर्ता और अभिनेता दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

फिलहाल 13 अक्टूबर की सुनवाई इस मामले में अहम मानी जा रही है। अदालत में पेशी के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि मामले की अगली प्रक्रिया क्या होगी और कथित 25 लाख रुपये के वित्तीय विवाद से जुड़े आरोपों पर अदालत आगे किस दिशा में सुनवाई करती है।

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