Satna : सतना में नौकरी से हटाए जाने से नाराज एक बिजली ऑपरेटर ने सब स्टेशन के सभी फीडरों की बिजली आपूर्ति बंद कर दी और बिजली के पोल पर चढ़कर तारों के बीच बैठ गया। ऑपरेटर अभिनेंद्र शुक्ला के इस विरोध से उचेहरा बिजली वितरण क्षेत्र के पौड़ी पिथौराबाद सब स्टेशन में हड़कंप मच गया। फीडरों की आपूर्ति बंद होने से सैकड़ों गांवों में बिजली गुल हो गई और ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, कर्मचारी के तारों के बीच बैठ जाने से स्थिति संवेदनशील हो गई।
जानकारी के अनुसार, अभिनेंद्र शुक्ला अपनी नौकरी समाप्त किए जाने की कार्रवाई से नाराज है। उसका कहना है कि उसे बिना किसी कारण काम से हटाया गया है। उसने दावा किया कि वह पूरी जिम्मेदारी और निष्ठा के साथ अपना काम करता रहा है। नौकरी से हटाए जाने के फैसले का विरोध करते हुए उसने यह कदम उठाया। हालांकि, उसे हटाने के कारण के संबंध में विभाग या संबंधित नियोक्ता का पक्ष दिए गए विवरण में शामिल नहीं है।
घटना पौड़ी पिथौराबाद सब स्टेशन की है, जो उचेहरा बिजली वितरण क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यहां ऑपरेटर ने सभी फीडरों की बिजली आपूर्ति बंद कर दी। इसके बाद वह पोल पर चढ़कर तारों के बीच बैठ गया। नौकरी से जुड़े विवाद का असर सब स्टेशन से बिजली प्राप्त करने वाले गांवों पर भी पड़ा। सैकड़ों गांवों में आपूर्ति बंद होने से यह मामला कर्मचारी के विरोध के साथ ग्रामीणों की परेशानी से भी जुड़ गया।
अभिनेंद्र का आरोप है कि नौकरी से हटाए जाने की कार्रवाई के पीछे कोई कारण नहीं बताया गया। वह अपने काम को जिम्मेदारी से करने की बात कह रहा है। उसके मुताबिक, निष्ठा के साथ काम करने के बावजूद उसे नौकरी से निकाल दिया गया। इसी नाराजगी में उसने विरोध का ऐसा तरीका अपनाया, जिसके कारण बिजली वितरण प्रभावित हुआ। उसके आरोपों की पुष्टि के लिए नौकरी समाप्त किए जाने से संबंधित आदेश और नियोक्ता का पक्ष महत्वपूर्ण होंगे।
ऑपरेटर के विरोध का सबसे व्यापक असर बिजली आपूर्ति पर पड़ा। सभी फीडरों की सप्लाई बंद होने से सैकड़ों गांवों की बिजली चली गई। ग्रामीणों को उस विवाद के कारण परेशानी झेलनी पड़ी, जो कर्मचारी की नौकरी से संबंधित है। उपलब्ध जानकारी में प्रभावित गांवों की अलग-अलग सूची नहीं दी गई है। बिजली आपूर्ति कितनी देर तक बंद रही, इसका भी उल्लेख नहीं है। इसलिए व्यवधान की कुल अवधि स्पष्ट नहीं है।
सब स्टेशन में हड़कंप की स्थिति कर्मचारी के पोल पर चढ़ने और आपूर्ति बंद करने से बनी। तारों के बीच जाकर बैठने के कारण मामला और संवेदनशील हो गया। इस स्थिति में कर्मचारी की सुरक्षित वापसी तथा गांवों की बिजली आपूर्ति, दोनों महत्वपूर्ण विषय बन गए हैं। हालांकि, उसे नीचे उतारने के लिए किसी बातचीत, प्रयास या कार्रवाई का विवरण उपलब्ध नहीं है। घटना के अंतिम परिणाम के बारे में भी जानकारी नहीं दी गई है।
अभिनेंद्र शुक्ला ने अपने विरोध का कारण नौकरी से हटाया जाना बताया है। उसके बयान में काम के प्रति जिम्मेदारी और निष्ठा का उल्लेख है। लेकिन उसकी नियुक्ति किस व्यवस्था के तहत हुई थी, यह स्पष्ट नहीं है। वह नियमित कर्मचारी था, संविदा पर कार्यरत था या किसी अन्य व्यवस्था में काम कर रहा था, इसका विवरण शामिल नहीं है। इसलिए उसकी सेवा शर्तों या नौकरी समाप्त करने की प्रक्रिया पर निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
नौकरी से जुड़े फैसले का विरोध करने और सभी फीडरों की आपूर्ति बंद करने के बीच इस घटना में सीधा संबंध बताया गया है। नाराज कर्मचारी ने अपने विरोध के दौरान सप्लाई रोकी, जिससे बड़ी संख्या में गांव प्रभावित हुए। इसके बाद पोल पर बैठ जाने से सब स्टेशन की स्थिति संवेदनशील हो गई। घटना में किसी के घायल होने का उल्लेख नहीं है, लेकिन कर्मचारी के तारों के बीच मौजूद होने की जानकारी दी गई है।
पोल पर बैठने के समय संबंधित तारों की तकनीकी स्थिति के बारे में विवरण उपलब्ध नहीं है। सभी फीडरों की आपूर्ति बंद किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन इससे वहां मौजूद हर तार की स्थिति का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। कर्मचारी की सुरक्षा को लेकर स्थिति संवेदनशील बताई गई है। इसलिए घटनाक्रम का वर्णन उपलब्ध तथ्यों तक सीमित रखना जरूरी है। किसी संभावित दुर्घटना को घटित घटना के रूप में नहीं बताया जा सकता।
इस मामले में विभागीय अधिकारियों, पुलिस या प्रशासन की प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं किया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि अभिनेंद्र के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है या नौकरी से संबंधित उसके आरोपों पर कोई जवाब दिया गया है। बिजली आपूर्ति बहाल होने और कर्मचारी के नीचे उतरने की जानकारी भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मामला सुलझ जाने या किसी पक्ष की जिम्मेदारी तय होने का दावा नहीं किया जा सकता।
फिलहाल सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, नौकरी से हटाए जाने से नाराज अभिनेंद्र शुक्ला ने पौड़ी पिथौराबाद सब स्टेशन के सभी फीडरों की बिजली आपूर्ति बंद कर दी और पोल पर तारों के बीच बैठ गया। इससे सैकड़ों गांवों में बिजली गुल हुई। कर्मचारी बिना कारण नौकरी से हटाने का आरोप लगा रहा है, जबकि उसके विरोध के कारण ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ा और सब स्टेशन में संवेदनशील स्थिति बन गई।