MP : वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व में बाघ संतुलन पर नई योजना

Update: 2026-05-31 09:48 GMT

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश के सागर जिले स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व, जिसे पहले नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य के नाम से जाना जाता था, इन दिनों एक अनोखी जैविक स्थिति का सामना कर रहा है। यहां बाघिनों की संख्या नर बाघों की तुलना में अधिक हो गई है, जिससे प्राकृतिक प्रजनन संतुलन प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। वन विभाग ने इस स्थिति को संतुलित करने के लिए विशेष कदम उठाने का निर्णय लिया है।

वन विभाग के अनुसार, इस असंतुलन को दूर करने के लिए दूसरे टाइगर रिज़र्व क्षेत्रों से नर बाघों को ट्रांसलोकेट किया जाएगा। इसका उद्देश्य क्षेत्र में बाघों की आबादी को संतुलित रखना और प्रजनन प्रक्रिया को प्राकृतिक रूप से सुचारू बनाए रखना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नर और मादा बाघों का अनुपात संतुलित नहीं रहता, तो दीर्घकाल में प्रजनन दर प्रभावित हो सकती है।

इस दिशा में पहली बड़ी पहल के तहत कान्हा टाइगर रिज़र्व से एक युवा रीवाइल्ड नर बाघ को चयनित किया गया है। इस बाघ को जल्द ही सागर स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व में स्थानांतरित किया जाएगा, जहां वह मौजूदा बाघिनों के साथ प्राकृतिक प्रजनन प्रक्रिया में भाग लेगा। यह कदम रिज़र्व में बाघों की आबादी को स्थिर और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कान्हा टाइगर रिज़र्व के उप निदेशक Prakash Kumar ने जानकारी दी कि चयनित रीवाइल्ड बाघ को ट्रांसलोकेशन प्रक्रिया के लिए पहले ही चिन्हित कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया वैज्ञानिक आधार पर की जा रही है, जिसमें बाघ के व्यवहार, स्वास्थ्य और जंगल में अनुकूलन क्षमता का विशेष रूप से आकलन किया गया है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ट्रांसलोकेशन से पहले सभी आवश्यक सुरक्षा और चिकित्सकीय प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम लगातार निगरानी रख रही है, ताकि बाघ को नए वातावरण में किसी तरह की समस्या न हो। यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि स्थानांतरण के बाद बाघ अपने नए आवास में आसानी से ढल सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की पहल न केवल बाघों की आबादी को संतुलित करने में मदद करेगी, बल्कि इससे पूरे इकोसिस्टम को भी लाभ मिलेगा। बाघ जैसे शीर्ष शिकारी जीवों की संख्या और लिंग संतुलन जंगल के प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व में बाघों की बढ़ती संख्या और उनके प्रजनन से जुड़ी यह स्थिति वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अध्ययन का विषय बन गई है। यह कदम भविष्य में अन्य टाइगर रिज़र्व के लिए भी एक मॉडल के रूप में देखा जा सकता है, जहां वैज्ञानिक तरीके से वन्यजीव प्रबंधन किया जाता है।

इस प्रकार, नर बाघों के ट्रांसलोकेशन की यह पहल न केवल प्रबंधन का एक अहम निर्णय है, बल्कि यह मध्य प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में एक नई दिशा भी प्रदान करती है, जिससे बाघों की स्वस्थ और संतुलित आबादी सुनिश्चित की जा सकेगी।

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