MP : कैबिनेट ने योजनाओं को जारी रखने का फैसला किया

Update: 2026-06-23 12:19 GMT

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना और कल्याणी विवाह सहायता योजना को आगे जारी रखने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 22 जून को मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में इन योजनाओं के संचालन के लिए 1,740 करोड़ 57 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई। यह प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से आगामी 5 वर्षों तक योजनाओं के निरंतर संचालन के लिए किया गया है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना प्रदेश में 1 अप्रैल 2006 से लागू है और इसका संचालन राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की कन्याओं, विधवाओं तथा परित्यक्त महिलाओं के सामूहिक विवाह में आर्थिक सहायता प्रदान करना है।

योजना के अंतर्गत प्रति कन्या 55 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाती है, जिससे विवाह संबंधी आवश्यक खर्चों में मदद मिल सके। इस योजना के माध्यम से सरकार सामूहिक विवाह कार्यक्रमों को बढ़ावा देती है, जिससे सामाजिक परंपराओं के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी कम होता है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक इस योजना के तहत 1 लाख 72 हजार 905 हितग्राहियों को लाभ प्रदान किया गया है। इस अवधि में सरकार ने 989 करोड़ 80 लाख 62 हजार रुपये से अधिक की सहायता राशि वितरित की है। यह आंकड़े इस योजना की व्यापक पहुंच और सामाजिक प्रभाव को दर्शाते हैं।

कैबिनेट बैठक में यह भी कहा गया कि यह योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके तहत गरीब परिवारों की कन्याओं का विवाह सामूहिक रूप से संपन्न कराया जाता है, जिससे पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ-साथ आर्थिक सहयोग भी सुनिश्चित होता है।

सरकार का मानना है कि इस योजना से न केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को राहत मिलती है, बल्कि यह विवाह की वैधानिक आयु को सुनिश्चित करने और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने में भी सहायक है। इसके माध्यम से समाज में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक उत्थान को बढ़ावा मिलता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से इन योजनाओं को लंबे समय तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है।

कल्याणी विवाह सहायता योजना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके तहत जरूरतमंद महिलाओं को पुनर्विवाह या सामाजिक पुनर्स्थापन के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। कैबिनेट के इस निर्णय से दोनों योजनाओं को निरंतरता मिलेगी और अधिक से अधिक लाभार्थियों को इसका लाभ मिल सकेगा।

इस निर्णय को सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने सकारात्मक कदम बताया है। उनका कहना है कि इससे गरीब परिवारों पर विवाह का आर्थिक बोझ कम होगा और महिलाओं के सशक्तिकरण को नई दिशा मिलेगी।

सरकार के इस फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि आने वाले वर्षों में और अधिक लाभार्थी इस योजना से जुड़ेंगे और सामूहिक विवाह कार्यक्रमों को और अधिक व्यापक स्तर पर आयोजित किया जाएगा।

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