एमपी | मध्य प्रदेश में सरकारी विभागों में दिव्यांगों के लिए 60 प्रतिशत पद अभी भी खाली पड़े हुए हैं। यह स्थिति तब है जब राज्य सरकार ने दिव्यांग जनों के लिए 37 हजार से अधिक पद आरक्षित किए हैं। राज्य में दिव्यांगों को सरकारी नौकरियों में अधिक अवसर प्रदान करने के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है, लेकिन इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया में देरी हो रही है।
सूत्रों के मुताबिक, अब तक सरकारी विभागों में दिव्यांगों के लिए निर्धारित पदों पर नियुक्तियां नहीं हो पाई हैं, जिससे कई दिव्यांग बेरोजगार रह गए हैं। इस स्थिति को लेकर राज्य सरकार ने कई कदम उठाने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें दिव्यांगों के लिए भर्ती प्रक्रिया को तेज़ी से पूरा करना शामिल है। इसके लिए नई भर्ती प्रक्रिया और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत की जा सकती है।
दिव्यांगों के लिए आरक्षित पदों की संख्या में वृद्धि का उद्देश्य उनके लिए सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाना था, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें। हालांकि, भर्ती प्रक्रिया में देरी और कर्मचारियों की कमी से स्थिति अब चुनौतीपूर्ण बन गई है।
राज्य सरकार के अधिकारी इस मामले में सुधार लाने के लिए जल्द ही ठोस कदम उठाने का वादा कर रहे हैं। वे इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि दिव्यांगों को सरकारी नौकरियों में अवसर देने से न केवल उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, बल्कि समाज में समानता की भावना भी बढ़ेगी।
यह खबर दिव्यांगों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। साथ ही, यह अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण हो सकता है कि वे भी दिव्यांगों के लिए आरक्षित पदों पर भर्ती प्रक्रिया को सुदृढ़ करें और दिव्यांग जनों के लिए रोजगार के अवसरों में वृद्धि करें।