महाकाल मंदिर में आधी रात को NSG कमांडो का बड़ा ऑपरेशन, 100 से ज्यादा जवानों ने संभाला मोर्चा
उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार, 22 अक्टूबर की देर रात सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ा आतंकवाद-रोधी अभ्यास किया। आगामी सिंहस्थ महाकुंभ 2028 से पहले मंदिर और महाकाल लोक की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के 100 से अधिक ब्लैक कैट कमांडो ने मॉक ड्रिल में हिस्सा लिया। यह अभ्यास रात करीब 11 बजे शुरू हुआ और शुक्रवार तड़के दो बजे तक चला। इस दौरान नीलकंठ गेट और नंदी गेट के आसपास के इलाकों को खाली कराया गया। इसके बाद निर्धारित स्थानों की लाइटें बंद कर आतंकवादी हमले जैसी काल्पनिक स्थिति तैयार की गई। आधुनिक हथियारों और सुरक्षा उपकरणों से लैस कमांडो ने आपातकालीन परिस्थितियों में कार्रवाई करने का अभ्यास किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मंदिर में किसी वास्तविक आतंकवादी खतरे की सूचना नहीं थी। यह पूरी कार्रवाई सुरक्षा तैयारियों की जांच के लिए आयोजित की गई थी।
रात 11 बजे शुरू हुआ कमांडो का विशेष अभियान
महाकालेश्वर मंदिर परिसर में गुरुवार रात सुरक्षा अभ्यास के दौरान विशेष सतर्कता बरती गई। निर्धारित समय पर सुरक्षा एजेंसियों ने नीलकंठ गेट और नंदी गेट के आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के निर्देश दिए।
इसके बाद मंदिर परिसर के कुछ हिस्सों में रोशनी बंद कर दी गई, ताकि कमांडो वास्तविक आपातकालीन परिस्थितियों के समान वातावरण में अपनी तैयारी का परीक्षण कर सकें।
अभ्यास के दौरान एनएसजी के जवान आधुनिक हथियारों और सुरक्षा उपकरणों के साथ निर्धारित स्थानों पर पहुंचे।
यह पूरी कार्रवाई लगभग तीन घंटे तक चली। इस दौरान अलग-अलग सुरक्षा टीमों की प्रतिक्रिया क्षमता और आपसी समन्वय की जांच की गई।
अंधेरे में ब्लैक कैट कमांडो ने संभाला मोर्चा
मॉक ड्रिल के दौरान एनएसजी के ब्लैक कैट कमांडो महाकाल लोक के मानसरोवर क्षेत्र से त्रिनेत्र कंट्रोल रूम की ओर बढ़े।
सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकवादियों के परिसर में घुसने की काल्पनिक परिस्थिति तैयार की थी।
कमांडो ने तय योजना के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर संदिग्धों की तलाश और उन्हें निष्क्रिय करने का अभ्यास किया।
इस दौरान यह भी परखा गया कि यदि मंदिर परिसर में हमलावर प्रवेश कर जाएं तो सुरक्षा बल कितनी तेजी से स्थिति पर नियंत्रण प्राप्त कर सकते हैं।
अभ्यास में सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता, निर्णय लेने की क्षमता और आपातकालीन परिस्थितियों में कार्रवाई करने की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया गया।
बंधकों को छुड़ाने का भी किया अभ्यास
एनएसजी की इस मॉक ड्रिल में केवल हमलावरों से निपटने की रणनीति ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालने की तैयारियों को भी परखा गया।
काल्पनिक परिस्थिति में कुछ लोगों को बंधक बनाए जाने की स्थिति तैयार की गई।
इसके बाद कमांडो ने डमी बंधकों को सुरक्षित छुड़ाने का अभ्यास किया।
इस प्रक्रिया में सुरक्षा बलों की त्वरित प्रतिक्रिया और बचाव अभियान के दौरान विभिन्न टीमों के बीच तालमेल की जांच की गई।
अधिकारियों के अनुसार, किसी भी वास्तविक आपातकालीन स्थिति में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसलिए इस तरह के अभ्यासों में बचाव कार्यों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है।
पुलिस और प्रशासन के बीच तालमेल की हुई जांच
इस विशेष अभ्यास में एनएसजी के साथ स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की तैयारियों का भी आकलन किया गया।
मॉक ड्रिल के माध्यम से यह जांच की गई कि किसी संभावित सुरक्षा खतरे की सूचना मिलने पर संबंधित एजेंसियां कितनी तेजी से सक्रिय होती हैं।
इसके अलावा आपातकालीन स्थिति में सूचना साझा करने, सुरक्षा घेरा बनाने और लोगों को सुरक्षित निकालने जैसी व्यवस्थाओं का भी परीक्षण किया गया।
अभ्यास का उद्देश्य यह पता लगाना था कि यदि भविष्य में कोई गंभीर घटना होती है तो विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय कितना प्रभावी रहेगा।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आलोक शर्मा ने दी जानकारी
उज्जैन के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आलोक शर्मा ने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है।
यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। त्योहारों और विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो जाती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक स्थल की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
आलोक शर्मा के अनुसार, मॉक ड्रिल के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद संभावित कमियों की पहचान की जाती है।
इसके बाद आवश्यक सुधार और अतिरिक्त तैयारियां की जा सकती हैं, ताकि किसी आपातकालीन परिस्थिति में प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो सके।
सिंहस्थ 2028 से पहले सुरक्षा तैयारियां तेज
उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होना है। इस धार्मिक आयोजन में देश और विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
सिंहस्थ के दौरान भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था, मंदिर सुरक्षा और आपातकालीन बचाव कार्य महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी।
इससे पहले तैयार की गई सुरक्षा योजना में 25 हजार से अधिक प्रशिक्षित होमगार्ड, सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों, आपदा मित्रों और एसडीआरएफ जवानों की भागीदारी का प्रस्ताव सामने आया था।
इनकी मदद से घाटों, प्रमुख मार्गों और धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत बनाने की तैयारी है।
इंदौर में भी हो चुकी है आतंकवाद-रोधी मॉक ड्रिल
उज्जैन में हुए इस अभ्यास से पहले इंदौर में भी एनएसजी और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त मॉक ड्रिल आयोजित की थी।
इंदौर एयरपोर्ट, डेली कॉलेज और राजवाड़ा जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर संभावित आतंकवादी हमले से निपटने का अभ्यास किया गया।
डेली कॉलेज में आयोजित अभ्यास करीब पांच से छह घंटे तक चला था।
इस दौरान आतंकवादियों को निष्क्रिय करने, बंधकों को सुरक्षित छुड़ाने और सुरक्षा बलों के बीच समन्वय की तैयारियां जांची गई थीं।
इंदौर और उज्जैन में आयोजित इन अभ्यासों को महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत बनाने की व्यापक तैयारियों का हिस्सा माना जा रहा है।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष तैयारी
महाकालेश्वर मंदिर में वर्षभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।
श्रावण मास, महाशिवरात्रि और दूसरे प्रमुख धार्मिक अवसरों पर मंदिर परिसर तथा महाकाल लोक में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है।
ऐसे समय में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और आपातकालीन स्थिति में लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक होती है।
एनएसजी की मॉक ड्रिल से सुरक्षा एजेंसियों को वास्तविक परिस्थितियों के समान वातावरण में अपनी तैयारियां परखने का अवसर मिला।
अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अभ्यास भविष्य की सुरक्षा योजनाओं को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
सुरक्षा में कमियों की पहचान करना मुख्य उद्देश्य
इस मॉक ड्रिल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था की संभावित कमजोरियों की पहचान करना भी था।
अभ्यास के दौरान यह देखा गया कि आपातकालीन सूचना मिलने से लेकर सुरक्षा बलों के सक्रिय होने तक पूरी प्रक्रिया किस प्रकार काम करती है।
इसके साथ ही श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालने और संबंधित विभागों के बीच समय पर समन्वय स्थापित करने की व्यवस्था का आकलन किया गया।
इन परिणामों के आधार पर भविष्य में सुरक्षा संबंधी आवश्यक सुधार किए जा सकते हैं।
वास्तविक खतरा नहीं, केवल सुरक्षा अभ्यास था
महाकालेश्वर मंदिर में देर रात हथियारबंद कमांडो की गतिविधियां देखकर कुछ लोगों के बीच चिंता पैदा होना स्वाभाविक था।
हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मंदिर में किसी वास्तविक आतंकवादी हमले या तत्काल खतरे की सूचना नहीं थी।
पूरी कार्रवाई पहले से निर्धारित आतंकवाद-रोधी मॉक ड्रिल का हिस्सा थी।
सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि इस प्रकार के अभ्यास महत्वपूर्ण धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा तैयारियों को परखने के लिए आयोजित किए जाते हैं।
फिलहाल लगभग तीन घंटे तक चले इस विशेष अभ्यास के बाद महाकाल मंदिर की सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की जा रही है।
आगामी सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए इस मॉक ड्रिल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन के दौरान किसी भी संभावित आपातकालीन स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।