Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : इंदौर में नगर निगम (IMC) द्वारा अग्नि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच शहर के प्रमुख छात्र केंद्र भंवरकुआं क्षेत्र में स्थित कई कोचिंग संस्थानों में गंभीर सुरक्षा खामियां सामने आई हैं। यह खुलासा अर्श रफीक विसाल और पिंटू नामदेव की फ्री प्रेस जांच के दौरान हुआ, जिसमें कई संस्थानों में बुनियादी सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई गई। हजारों छात्रों की सुरक्षा को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
भंवरकुआं, जिसे इंदौर का सबसे बड़ा छात्र हब माना जाता है, वहां स्थित कई कोचिंग सेंटरों में अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन निकास व्यवस्था कमजोर पाई गई। जांच के अनुसार, टावर स्क्वायर के पास स्थित कॉन्सेप्ट एकेडमी में केवल तीन फुट चौड़ी सीढ़ी ही एकमात्र प्रवेश और निकास मार्ग के रूप में काम कर रही थी। इसके अलावा इमारत में खराब वेंटिलेशन, एयर कंडीशनर के पास बिजली के तारों का अव्यवस्थित जाल और खिड़कियों के आसपास भी जोखिमपूर्ण स्थिति देखी गई।
इसी भवन में एक मेडिकल सुविधा, कैफे, बेसमेंट पैथोलॉजी लैब और कोचिंग कक्षाएं एक ही संरचना में संचालित हो रही थीं, जिससे आपात स्थिति में जोखिम और अधिक बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी बहुउद्देश्यीय इमारतों में सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी होता है, लेकिन यहां कई जगहों पर इसकी अनदेखी दिखाई दी।
भंवरकुआं क्षेत्र में ही स्थित राणावत ट्रेड सेंटर में भी गंभीर खामियां पाई गईं। यहां पीएस अकादमी और टैली कक्षाएं अत्यधिक भीड़भाड़ वाले स्थानों पर चल रही थीं। खिड़कियों को होर्डिंग से ढक दिया गया था, जिससे प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन बाधित हो रहा था। इसी तरह दिशा कंप्यूटर इंस्टीट्यूट, विजन आईएएस अकादमी, द नॉलेज कैंपस इंस्टीट्यूट और सुंदरम कॉम्प्लेक्स में स्थित जीत सहायता क्लासेज में भी इसी तरह की सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आईं।
जांच में यह भी पाया गया कि वेदा कॉम्प्लेक्स में कुछ कक्षाएं वेंटिलेशन के लिए टूटे हुए कांच के हिस्सों पर निर्भर थीं, जबकि खिड़कियों को काले शीशे से ढका गया था, जिससे अंदर का वातावरण और अधिक बंद और असुरक्षित हो गया था। वहीं हर्षदीप आर्केड में टिन की छत के नीचे कोचिंग कक्षाएं संचालित होती पाई गईं, जो आग लगने की स्थिति में बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं।
इन सभी मामलों में सबसे बड़ी चिंता यह है कि इन कोचिंग संस्थानों में रोजाना हजारों छात्र पढ़ाई करते हैं। किसी भी आपात स्थिति, खासकर आग जैसी दुर्घटना में सुरक्षित निकास और उचित सुरक्षा व्यवस्था की कमी गंभीर नुकसान का कारण बन सकती है।
नगर निगम द्वारा भले ही शहर में अग्नि सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इन संस्थानों की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। विशेषज्ञों का मानना है कि निरीक्षण और सख्त कार्रवाई की कमी के कारण ऐसी खामियां लंबे समय से बनी हुई हैं।
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने भी इन खुलासों के बाद चिंता जताई है। उनका कहना है कि कोचिंग संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन कई जगहों पर इसे नजरअंदाज किया जा रहा है।
नगर प्रशासन पर अब यह दबाव बढ़ गया है कि वह इन संस्थानों की विस्तृत जांच करे और जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाए, वहां सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की मांग भी उठ रही है।
कुल मिलाकर, इंदौर के भंवरकुआं क्षेत्र में सामने आई यह स्थिति कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जहां एक ओर प्रशासन अभियान चला रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर खामियां अब भी बनी हुई हैं, जिन्हें तुरंत सुधारने की आवश्यकता है।